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रिव्यू : किसी के अनु'कूल' नहीं है 'क्या कूल हैं हम-3'

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रिव्यू : किसी के अनु'कूल' नहीं है 'क्या कूल हैं हम-3'
मुंबई:

फिल्म 'क्या कूल हैं हम-3' की कहानी है, दो दोस्तों की, जिसमें एक संस्कारी है तो दूसरा चतुर-चालाक, जो लड़कियों के पीछे भागता रहता है। इस संस्कारी की भूमिका में हैं, तुषार कपूर और कैसानोवा के रोल में हैं, आफताब शिवदसानी। तुषार की कुछ गलतियों की वजह से उसके पिता उसे घर से निकाल देते हैं और ये दोनों दोस्त पहुंच जाते हैं बैंकॉक में, जहां इनका तीसरा मित्र रॉकी यानी कृष्णा रहता है। रॉकी निर्माता है, पोर्न फिल्मों का और अपने इन दोस्तों से भी वह पोर्न फिल्म में अभिनय करवाता है।

फ़िल्म 'क्या कूल हैं हम-3' को एक सेक्स कॉमेडी की तरह पेश किया गया मगर इसमें सिर्फ सेक्स है, कॉमेडी फिल्म से नदारत है। आधी से ज्यादा फिल्म में कॉमेडी के नाम पर पुरानी फिल्मों के डायलॉग्स, चुटकुले और सीन हैं। कई फिल्मकारों और अभिनेताओं की नकल भी की गई है।

फिल्म की कॉमेडी की अगर बात करें तो कुछ इक्का-दुक्का ही दृश्य हंसाएंगे। निर्देशक उमेश खड़गे का निर्देशन कमज़ोर है, क्योंकि इसके कॉमिक सीन हंसा नहीं पाते। फिल्म में कोई कहानी नहीं है सिवाए दूसरी फिल्मों के मजाक उड़ाने के। बेहद कमजोर पटकथा है और सेक्स से भरे सीन और डॉयलॉग हैं, वे भी ऐसे, जो बेहद फूहड़ लगते हैं।


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तुषार कपूर इन दिनों वयस्क कॉमेडी का चेहरा बन चुके हैं। आफताब भी साधारण लगे हैं। कृष्णा ने थोड़ी जान डालने की कोशिश की है। फिल्म की अभिनेत्रियां मनदाना करीमी, जिज़ेल या मेघना नायडू अभिनय से ज्यादा अंग प्रदर्शन करती दिखी हैं।

कहने को यह वयस्क कॉमेडी फिल्म है मगर वयस्क संवाद और कुछ वयस्क दृश्यों के अलावा फिल्म में कुछ नहीं है। इससे ज्यादा आप कॉमेडी शो देखकर हंस सकते हैं। इसलिए इस फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 1 स्टार।



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