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अपने मुकदमे पर कोर्ट के फैसले को लेकर बहुत परेशान हैं सलमान खान

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अपने मुकदमे पर कोर्ट के फैसले को लेकर बहुत परेशान हैं सलमान खान
मुंबई: अपने फिल्मी करियर में सलमान ने बड़ी ऊंचाइयां हासिल की हैं और उनके प्रशंसकों की तादाद भी अधिक है, लेकिन सुपरस्टार सलमान खान खुद के खिलाफ चल रहे उन अदालती मामलों के फैसलों को लेकर परेशान हैं जो अभी आने बाकी हैं।

'मेरी जिन्दगी जो भी मोड़ लेगी, मैं सामना करुंगा...'
सलमान ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘क्या फैसला आएगा। अगर आप पांच-पांच साल भी जोड़ेंगे तो यह 10-15 साल हो जाता है। यह मेरे माता-पिता और मेरे सिर पर एक बड़ी चिंता है... यह बहुत बड़ी मुश्किल है। ये मजिस्ट्रेट अदालत में नहीं है... उच्च न्यायालय में है। इन फैसलों के बाद मेरी जिंदगी जो भी मोड़ लेगी, मैं उसका सामना करुंगा।’

'मेरे पैरेंट्स भी कठिर दौर से गुजर रहे हैं...'
उन्होंने कहा, ‘इतना सब कुछ करने के बाद आपको कॉमेडी करनी होती है, ‘बिग बॉस’ करना होता है, लेकिन उसी वक्त आपके सिर पर तलवार लटक रही होती है। मेरे माता-पिता भी कठिन दौर से गुजर रहे हैं।’ सलमान खान ने कहा कि उनका काम उन्हें इन फैसलों से बचा नहीं सकता ।

उन्होंने कहा, ‘मेरे काम की खूबसूरती यह है कि आप कितना अच्छा करें पर लोग बड़े बेरहम होते हैं, सोनम के साथ रोमांस, जैकलीन के साथ डांस, पोलैंड में शूटिंग, 600 करोड़ रुपये की कमाई.. लेकिन उन्हें नहीं पता कि हमारे हिस्से में क्या आया है.. वे कहते हैं कि उसके ऊपर मामला चल रहा है फिर भी वह मजे में है।’

'मेरे अच्छे कामों का कोई मतलब नहीं है...'
सलमान ने कहा, ‘ये सारी चीजें मेरे खिलाफ हैं.. जिन लोगों को मेरे मामलों में फैसला सुनाना है, उनके लिए मेरे अच्छे कामों का कोई मतलब नहीं है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह दुआओं और इनायतों को मानते हैं, सलमान ने कहा, ‘हमें दुआओं, इनायतों का इंतजार रहेगा। यह उन लोगों के लिए है जो दुआओं में यकीन रखते हैं। हां, मैं भी दुआओं में यकीन रखता हूं... कई सारे लोग इसमें विश्वास रखते हैं और ऐसे भी लोग हैं जो इसे नहीं मानते। जिनके पास ताकत है, वे इनमें यकीन नहीं रखते।’

काम के मोर्चे पर सलमान अपनी अगली फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ की रिलीज को लेकर आशान्वित हैं। सलमान पर फिलहाल 2002 में मुंबई में हुए हिट-एंड-रन मामले में मुकदमा चल रहा है। उनके खिलाफ दो और मामले - एक जोधपुर में शस्त्र अधिनियम (गैरकानूनी रूप से हथियार रखने) और दूसरा वन्यजीव सुरक्षा कानून (काले हिरण के शिकार का मामला) के तहत लंबित हैं।


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