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बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्‍यताएं और रोचक बातें

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म अनुयायियों का सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन बौद्ध धर्म को मानने वाले कई तरह के समारोह आयोजित करते हैं. दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयायी इसे अपने अपने तरीके से मनाते हैं. आइए नजर ड़ालें इससे जुड़ी रोचक बातों पर-

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बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्‍यताएं और रोचक बातें

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म अनुयायियों का सबसे बड़ा त्योहार है.

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म अनुयायियों का सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन बौद्ध धर्म को मानने वाले कई तरह के समारोह आयोजित करते हैं. दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयायी इसे अपने अपने तरीके से मनाते हैं. आइए नजर डालें इससे जुड़ी रोचक बातों पर-

मान्‍यताएं
माना जाता है कि इस दिन पुण्य कर्म करने से कई फलों की प्राप्ति होती है. इस दिन से जुड़ी मान्‍यताएं-

 
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  • कहते हैं कि अगर बुद्ध पूर्णिमा के दिन धर्मराज के निमित्त जलपूर्ण कलश और पकवान दान किए जाएं तो सबसे बड़े दान गोदान के बराबर फल मिलात है.
  • हिंदू मान्‍यता के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन पांच या सात ब्राह्मणों को मीठे तिल दान करने चाहिए. ऐसा करने से पापों का नाश होता है.
  • मान्‍यता तो यह भी है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन अगर एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चंद्रमा या सत्यनारायण का व्रत किया जाए, तो जीवन में कोई कष्‍ट नहीं होता.

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ये भी जानें

 
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  • श्रीलंका में बुद्ध पूर्णिमा के दिन को वेसाक उत्सव के नाम से जाना जाता है. यह शब्‍द वैशाख शब्द का अपभ्रंश है.
  • श्रीलंका में बुद्ध पूर्णिमा को काफी हद तक भारत की दीपावली की तरह मनाया जाता है. यहां इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं. घरों और प्रांगणों को फूलों से सजाया जाता है.
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन दिल्ली संग्रहालय बुद्ध की अस्थियों को बाहर निकालता है और बौद्ध अनुयायी वहां आकर प्रार्थना करते हैं.
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधगया में काफी लोग आते हैं. दुनिया भर से बौद्ध धर्म को मानने वाले यहां आते हैं.
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है. बोधिवृक्ष बिहार के गया जिले में बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में है. वास्‍तव में यह एक पीपल का पेड़ है. मान्‍यता है कि इसी पेड़ के नीचे इसा पूर्व 531 में भगवान बुद्ध को बोध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था.
  • बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष की टहनियों को भी सजाया जाता है. इसकी जड़ों में दूध और इत्र ड़ाला जाता है और दीपक जलाए जाते हैं.
  • कुछ लोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन पंछियों को भी पिंजरों से आजाद करते हैं. 


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