Dussehra 2020: बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है दशहरा, जानें तिथि, पूजा, शुभ मुहूर्त और रेसिपी

Dussehra 2020: दशहरे को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, दशहरा हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. दशहरे को असत्य पर सत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.

Dussehra 2020: बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है दशहरा, जानें तिथि, पूजा, शुभ मुहूर्त और रेसिपी

नवरात्रि के ठीक नौ दिन बाद दशहरा मनाया जाता है.

खास बातें

  • दशहरे को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है
  • दशहरे का पर्व देशभर में भाईचारे के साथ मनाया जाता है.
  • दशहरे में मीठा पान खाया जाता है पान को प्रेम और जीत का प्रतीक माना जाता

Dussehra 2020: इस साल दशहरा 25 अक्टूबर (रविवार) को मनाया जा रहा है. दशहरा (Dussehra) को विजयदशमी (Vijaydashmi) के नाम से भी जाना जाता है. दशहरा हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. दशहरे को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. विजयादशमी के दिन शुभ मुहूर्त में शस्त्र पूजा की भी परंपरा है. दशहरा दीवाली से ठीक 20 दिन पहले आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. दशहरे को असत्य पर सत्य की जीत और  बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के ठीक नौ दिन बाद दशहरा मनाया जाता है. मान्यता है कि इस भगवान श्री राम ने लंका के राजा रावन का अंत किया था. और इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के दानव का वध कर उसके आतंक से देवताओं को मुक्‍त किया था. नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दसवें दिन नौ शक्तियों के विजय के उत्‍सव के रूप में विजयदशमी (Vijay Dashmi) या दशहरा (Dussehra) मनाया जाता है. इस साल दशहरा का त्योहार 25 अक्तूबर 2020 को है और कई जगहों पर 26 को भी मनाया जाएगा.

दशहरा स्पेशल रेसिपीः

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दशहरे के दिन पूरे भारत में अलग-अलग जगह कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं. इस दिन पान, मीठा पान भी खाया जाता है. पान को प्रेम और जीत का प्रतीक माना गया है. दशहरे का पर्व देशभर में भाईचारे के साथ मनाया जाता है. इस दिन कुछ परंपराएं भी निभाई जाती है, जिसमें पान खाना शामिल है. दशहरा स्पेशल रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें. जलेबी केसरी या पीले रंग की एक पारंपरिक मिठाई है जिसे दशहरा, दिवाली या अन्य खास अवसरों पर भारतीय घरों में बनाया जाता है. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे घर पर आसानी से जलेबी को बनाएं.

कितने लोगों के लिएः 14-20

जलेबी बनाने का समयः

जलेबी बनाने का समय लगभग 50 मिनट

जलेबी की तैयारी का समय लगभग 10 मिनट

जलेबी की सामग्रीः

1/2 कप मैदा
1/4 कप दही
1 कप चीनी
1 कप पानी
तेल या घी
बीच में छेद हुआ हो कपड़ा

जलेबी बनाने की वि​धिः

सबसे पहले मैदे और दही को एक साथ मिलाकर गाढ़ा बैटर तैयार कर लें.

अगर ज़रूरत पड़े, तो आप इसमें पानी भी डाल सकते हैं.

करीब छह से सात घंटे के लिए इसमें खमीर उठने को रख दें.

जब बैटर गुदागुदा हो जाए और ऊपर छाग दिखने लगे, तो चाशनी तैयार करें.

पानी, चीनी को मिलाकर हल्की आंच पर चाश्नी बनाएं.

तेज़ आंच पर छोड़े समय के लिए चाश्नी को गाढ़ा करें.

जब चाश्नी तार छोड़ने लगे, तो इसे आंच से उतार कर हल्का ठंडा कर लें.

एक गहरा पैन लें. उसमें तेल या घी डालकर गर्म कर लें.

जलेबी बनाने वाले कपडे में तैयार किया बैटर डालें. जितना छोटा छेद होगा, उतनी ही पतली जलेबी बनाएंगी.

अब बैटर को गर्म तेल में डालें. मीडियम आंच पर पकाएं. 

जब जलेबी दोनों तरफ से हल्के भूरे रंग की हो जाएं, तो इन्हें निकाल लें. चाश्नी में डालें.

चाश्नी से निकाल कर गर्मागर्म सर्व करें.

दशहरे का शुभ मुहूर्तः

दशमी तिथि प्रारंभ - 25 अक्टूबर को सुबह 07:41 मिनट से 
विजय मुहूर्त - दोपहर 01:55 मिनट से 02 बजकर 40 तक
अपराह्न पूजा मुहूर्त - 01:11 मिनट से 03:24 मिनट तक
दशमी तिथि समाप्त - 26 अक्टूबर को सुबह 08:59 मिनट तक रहेगी

दशहरे के दिन शस्त्र पूजाः

इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना बड़ा लाभदायक माना जाता है. माना जाता है कि इस दिन अस्त्र शस्त्र की पूजा करने से मां दुर्गा उनपर अपनी कृपा बरसाती है. और उन्हे शत्रुओं के भय से बचाती हैं.

विजयदशमी पर मां दुर्गा की पूजाः

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विजय दशमी के दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा की जाती हैं. इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के दानव का वध कर उसके आतंक से देवताओं को मुक्‍त किया था. माना जाता है, कि इस दिन पूजा करने से सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होता है, और जीवन में विजय की प्राप्त होती है. मान्यता है कि नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे के दिन पूजा का विधान है.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.