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Eid 2019 Date: ईद-उल-फितर 2019 कब होगी? चांद देखकर ही क्यों मनाते हैं ईद, क्या है दोनों के बीच का संबंध...

Eid 2019 Date and Moon Time: शव्वाल का चांद नजर न आने पर माना जाता है कि रमजान का महीना मुकम्मल होने में कमी है. इसी वजह से ईद अगले दिन या जब भी चांद नजर आए तब मनाई जाती है.

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Eid 2019 Date: ईद-उल-फितर 2019 कब होगी? चांद देखकर ही क्यों मनाते हैं ईद, क्या है दोनों के बीच का संबंध...

Happy Eid 2019: ईद और चांद का खास कनेक्शन

खास बातें

  1. ईद का चांद रमजान के 30वें रोज़े के बाद ही दिखता है.
  2. इसे मीठी ईद भी कहा जाता है.
  3. दिन ईद का चांद नजर आता है ईद भी उसी दिन मनाई जाती है.
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Eid Ul Fitr 2019 Date and Moon News: जब भी ईद की बात होती है, तो सबसे पहले जिक्र आता है ईद के चांद (Eid ka Chand) का. ईद का चांद रमजान (Ramadan 2019) के 30वें रोज़े के बाद ही दिखता है. इसी चांद को देखकर ईद मनाई जाती है. हिजरी कैलेण्डर (Islamic Calendar 2019), जोकि इस्लामिक कैलेण्डर है, के अनुसार ईद साल में दो बार आती है. एक ईद होती है ईद-उल-फितर (2019 Eid Ul Fitr) और दूसरी को कहा जाता है ईद-उल-जुहा. ईद-उल-फितर को महज ईद भी कहा जाता है. इसके अलावा इसे मीठी ईद (Meethi Eid 2019) भी कहा जाता है. जबकि ईद-उल-जुहा को बकरीद (Bakra Eid 2019) के नाम से भी जाना जाता है. अब आते हैं इस सवाल पर कि ईद किस दिन मनाई जाती (Eid Kab Hai 2019) है. तो जिस दिन ईद का चांद नजर आता है ईद भी उसी दिन मनाई जाती है. यही वजह है कि कई बार एक ही देश में अलग-अलग दिन ईद मनाई जा सकती है. जहां चांद पहले देखा जाता है वहां ईद पहले मन जाती है... इस बात से यह तो साफ होता है कि ईद और चांद के बीच कुछ खास रिश्ता है. आईए आज आपको बताते हैं कि ईद और चांद के बीच है क्या स्पेशल कनेक्शन... 

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Eid 2019 Date: ईद-उल-फितर 2019 कब होगी? 

ईद और चांद का खास कनेक्शन | Eid al-Fitr 2019 Moon Involved in Eid Moon

ईद-उल-फ़ितर हिजरी कैलंडर (हिजरी संवत) के दसवें महीने शव्वाल यानी शव्वाल उल-मुकरर्म की पहली तारीख को मनाई जाती है. अब समझने वाली बात यह भी है कि हिजरी कैलेण्डर की शुरुआत इस्लाम की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना से मानी जाती है. वह घटना है हज़रत मुहम्मद द्वारा मक्का शहर से मदीना की ओर हिज्ऱत करने की यानी जब हज़रत मुहम्मद ने मक्का छोड़ कर मदीना के लिए कूच किया था.

हिजरी संवत जिस हिजरी कैलेण्डर का हिस्सा है वह चांद पर आधारित कैलेण्डर है. इस कैलेण्डर में हर महीना नया चांद देखकर ही शुरू माना जाता है. ठीक इसी तर्ज पर शव्वाल महीना भी ‘नया चांद' देख कर ही शुरू होता है. और हिजरी कैलेण्डर के मुताबिक रमजान के बाद आने वाला महीना होता है शव्वाल. ऐसे में जब तक शव्वाल का पहला चांद नजर नहीं आता रमजान के महीने को पूरा नहीं माना जाता.


 
शव्वाल का चांद नजर न आने पर माना जाता है कि रमजान का महीना मुकम्मल होने में कमी है. इसी वजह से ईद अगले दिन या जब भी चांद नजर आए तब मनाई जाती है.

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