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World Liver Day 2017: लीवर से जुड़ी बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव

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World Liver Day 2017: लीवर से जुड़ी बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव

प्रतीकात्‍मक चित्र

लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है. लीवर पाचन में सहायक कई तरह के रस बनाता है, साथ ही डी-टॉक्सीफिकेशन भी करता है. जो भी हम खाते हैं, दवाओं समेत, वह हर चीज हमारे लीवर से होकर जाती है. हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्‍ड लीवर डे मनाया जाता है. जिसका उद्देश्‍य लोगों में लीवर से जुड़ी अलग-अलग तरह की परेशानियों पर जागरुकता फैलाना है. डब्‍लयूएचओ के अनुसार लीवर से जुड़ी बीमारियां भारत में होने वाली मौतों के कॉमन कारणों में दसवें नंबर पर है.

सेहत के लिए गलत कही जाने वाली आदतों की वजह से लीवर से जुड़ी परेशानियां होने की संभावना सबसे ज्‍यादा होती है. जैसे शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान, अधिक नमक सेवन वगैरह. हेपेटाइटिस ए, बी, सी जैसी बीमारियां भी लीवर पर बुरा असर डालती हैं. इसके अलावा लाइफस्‍टाइल भी काफी हद तक लीवर से जुड़ी बीमारियां पैदा करता है. मोटापा या ओबेसिटी भी लीवर के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं. हालांकि यह अच्‍छी बात है कि लीवर में यह खास ताकत होती है कि वह समय के साथ-साथ खुद को रिपेयर और रीजनरेट कर सकता है. हमारी जीवनशैली से होने वाली लीवर से जुड़ी आम बीमारियां हैं- हेपेटाइटिस ए, बी और सी, फैटी लीवर, सिरोसिस, कैंसर वगैरह.

कारण:
जब भी हम बीमार होते हैं, तो मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ कि हमें यह बीमारी हुई. आईए जानते हैं कि लीवर से जुड़ी इन समस्‍याओं के कारण क्‍या हो सकते हैं-
  • अनुवांशिक कारण
  • एक अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और गलत खानपान.
  • हेपेटाइटिस ए, बी या सी इंफेक्‍शन
  • एल्‍कोहल का अधिक सेवन या अधिक कॉलेस्‍ट्रॉल वाला आहार लेना
  • हाई बीएमआई, जोकि टाइप 2 डायबिटीज और ऑबेसिटी के खतरे को बढ़ाता है.
लक्षण:
अक्‍सर हमें लीवर से जुड़ी समस्‍या होने पर हम समय रहते उसके बारे में पता नहीं लगा सकते. लेकिन अगर हम अपनी सेहत का ध्‍यान रखें, तो हमारे शरीर में होने वाले बदलाव हमें बता सकते हैं कि हमारा शरीर स्‍वस्‍थ नहीं है. ठीक इसी तरह लीवर से जुड़ी समस्‍याओं को भी हम काफी हद तक उसके लक्षणों से पहचान सकते हैं.
  • त्‍वचा और आंखों का पीला हो जाना.
  • पेटू में दर्द रहना या सूजन हो जाना.
  • टखनों के पास और पैरों में सूजन रहना.
  • त्‍वचा पर खुजली होना.
  • पेशाब का गहरा पीला होना.
  • मल का रंग गहरा होना, मल से खून आना माल का टार की तरह होना.
  • जल्‍दी थकान महसूस होना.
  • नॉजिया या उल्‍टी आना.
  • पाचनतंत्र में गड़बड होना.
बचाव
  • लीवर का बचाव करने के लिए अपनी जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करें.
  • धूम्रपान या शराब का ज्यादा सेवन करने से लीवर के खराब होने या सिरोसिस का खतरा पैदा होता है. इसलिए अगर आपको इनकी आदत है, तो आज से ही इन्‍हें छोड़ने की कोशिश करें.
  • आपके शरीर के लिए नींद बहुत अहम है. अगर आपकी नींद पूरी नहीं होगी, तो इससे आपके मेटाबॉलिज्म पर असर होगा, जिससे कि लीवर से जुड़े रोगों का खतरा बढ़ता है.
  • यह तय करें कि आप नियमित रूप से व्‍यायाम करें. कम से कम हफ्ते में 4 से 5 बार तो जरूर.
  • इंजेक्‍शन लगवाएं. अपने डॉक्‍टर से बात करें और हेपेटाइटिस ए और बी का वेक्सिन लगवा लें.
  • हाई फाइबर युक्‍त आहार खाएं. खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रॉकली, गोभी, गाजर वगैरह शामिल करें.    



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