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चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में टकराव

राहुल गांधी के इंटरव्यू को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना, कांग्रेस ने आयोग पर मोदी का गुलाम होने का आरोप लगाया

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चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में टकराव

चुनाव आयोग के रवैये को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं और बीजेपी ने उन आरोपों का विरोध किया है.

खास बातें

  1. चुनाव आयोग ने राहुल और चैनलों को नोटिस जारी किया
  2. कांग्रेस ने पीएम के वोट देने के बाद हुए रोड शो पर आपत्ति जताई
  3. बीजेपी के बड़े नेताओं का डेलिगेशन चुनाव आयोग पहुंचा
नई दिल्ली: गुजरात में दूसरे दौर की वोटिंग के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक टकराव तीखा होता जा रहा है. कई चैनलों पर राहुल गांधी के इंटरव्यू को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना तो कांग्रेस ने उस पर मोदी का गुलाम होने का आरोप लगा डाला. बीजेपी भी डेलिगेशन लेकर चुनाव आयोग पहुंच गई.

बुधवार को दिल्ली से गुजरात तक कई चैनलों पर राहुल गांधी नजर आए. दूसरे दौर का प्रचार खत्म होने के बाद चले इंटरव्यू को लेकर चुनाव आयोग ने राहुल और चैनलों को नोटिस जारी किया तो कांग्रेस बिफर पड़ी. उसने चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री की कठपुतली बता डाला.

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता, रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "मोदी जी की डूबती नाव को अब EC की कठपुतली का सहारा मिल गया है.  CEC कभी मोदी के पीएस हुआ करते थे ...लेकिन आज उच्च संवैधानिक पद पर बैठने के बाद भी वे मोदी जी के पीएस की तरह ही काम कर रहे हैं."

कांग्रेस की शिकायत है कि चुनाव आयोग ने राहुल के इंटरव्यू पर एतराज किया मगर प्रधानमंत्री ने वोट देने के बाद जो रोड शो किया, उस पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने फिक्की में प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण पर चुनाव आयोग की अनदेखी पर भी सवाल खड़े किए. कांग्रेस महासचिव और प्रभारी, गुजरात अशोक गहलौत ने कहा, "अगर पीएम खुद ऐसा करेंगे तो बांकि लोगों को क्या प्रेरणा देंगे?" चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ युवा और महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किए.

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दरअसल गुजरात में चुनाव प्रक्रिया के खत्म होने के आखिरी दिन जिस तरह से कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने बयानबाज़ी की ...और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए...उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुजरात में सियासी जंग कितनी तीव्र थी और इसमें किस हद तक पीएम मोदी और राहुल गांधी की राजनीतिक साख दांव पर लगी है.

कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बीच बीजेपी के बड़े नेताओं का डेलिगेशन चुनाव आयोग पहुंच गया. डेलिगेशन में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी शामिल थे. बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर एक संवैधानिक संस्था को कमज़ोर करने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री ने कोई क़ायदा नहीं तोड़ा.

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VIDEO : मोदी ने की राहुल की मदद


बीजेपी के गुजरात प्रभारी, भूपेंद्र यादव ने कहा, "कांग्रेस हमेशा ही सत्ता में आकर संवैधानिक संस्थाओं को कठपुतली बनाने का प्रयास करती रही है. एमएस गिल को कांग्रेस ने उसी दिन पार्टी में शामिल कराया जिस दिन वह रिटायर हुए...फिर उन्हें सांसद बनाया गया और फिर मंत्री...टीएन शेषन को भी चुनाव कांग्रेस ने लड़वाया था." साफ है, ये तीखा टकराव बताता है कि गुजरात की लड़ाई बिल्कुल नाक की लड़ाई हो चुकी है.


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