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गुजरात में नए सीएम के लिए ये 5 नाम चर्चा में, जातिगत समीकरण और आंदोलन बने बड़ी चुनौती

गुजरात में जातिगत आंदोलन के उभार ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. इस मुश्किल का जिक्र पीएम मोदी ने सांसदों के संबोधन में भी किया है. ऐसे में सवाल इस बात का है कि बीजेपी के पास ऐसे कितने चेहरे हैं जो बदलते समीकरणों में फिट बैठ सकें.

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गुजरात में नए सीएम के लिए ये 5 नाम चर्चा में, जातिगत समीकरण और आंदोलन बने बड़ी चुनौती

गुजरात में सीएम के नाम पर हो रही है माथापच्ची

खास बातें

  1. अरुण जेटली और सरोज पांडेय को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है
  2. एक निर्दलीय सांसद ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है
  3. गुजरात में 5 नामों पर हो रही है चर्चा
अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा चुनाव में छठी बार सरकार बनाने जा रही है बीजेपी आज राज्य के नए सीएम का ऐलान कर देगी. नरेंद्र मोदी के पीएम बन जाने के बाद से गुजरात में बीजेपी के लिए नया नेता खोजना माथापच्ची ही साबित हुआ है. इसके साथ ही गुजरात में जातिगत आंदोलन के उभार ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.पीएम मोदी ने भी सांसदों के संबोधन में जातिगत राजनीति बढ़ने का जिक्र किया है. ऐसे में सवाल इस बात का है कि बीजेपी के पास ऐसे कितने चेहरे हैं जो बदलते समीकरणों में फिट बैठ सकें. फिलहाल सीएम पद की रेस में कुछ नामों की चर्चा हो रही है.

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मौजूदा सीएम विजय रुपाणी
आनंदीबेन पटेल के हटने के बाद विजय रुपाणी को सीएम बनाया गया था. वह राजकोट पश्चिम से चुनाव जीतकर आए हैं. वह बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के करीबी हैं. संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं. लेकिन उनका कमजोर पक्ष यह है कि उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी को पिछले 22 सालों में सबसे कम सीटें मिली हैं. उनके नेतृत्व और क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं.

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नितिन पटेल
पाटीदार आंदोलन के बाद से नाराज पटेलों को शांत करने के लिए बीजेपी नितिन पटेल को सीएम बनाने का ऐलान कर सकती है. वह इस चुनाव में भी मेहसाणा से जीतकर आए हैं जो पाटीदार आंदोलन का केंद्र रहा है. बीजेपी से 30 सालों से जुड़े हुए हैं और पार्टी में पाटीदार समुदाय के प्रमुख चेहरा हैं. इसके साथ सरकार में वह कई पदों पर काम कर चुके हैं.

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पुरुषोत्तम रुपाला 
सौराष्ट्र के बड़े पाटीदार नेता हैं पुरुषोत्तम रुपाला. वह इस समय केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और उनकी छवि सख्त प्रशासक की मानी जाती है. पुरुषोत्तम रुपाला इस समय राज्यसभा सांसद हैं. 

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मनसुख मांडविया
सौराष्ट्र से आने वाले मनसुख मांडविया भी पाटीदारों के लेउवा समुदाय से हैं. वह पीएम मोदी के काफी करीबी माने जाते हैं. मांडविया भी अभी केंद्र में मंत्री हैं. मनसुख मांडविया की उम्र अभी सिर्फ 45 साल है और गुजरात में अभी बीजेपी को ऐसी ही किसी नेता की तलाश है जो लंबी पारी खेल सके. मांडविया आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं और छात्र जीवन में एबीवीपी से जुड़े थे.

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वजूभाई वाला
सौराष्ट्र के कराडिया राजपूत नेता हैं. वह अभी कर्नाटक के राज्यपाल हैं. इससे पहले वह राज्य के 18 बार वित्तमंत्री रह चुके हैं. आरएसएस के स्वयंसेवक रहे वजूभाई जनसंघ के समय से जु़ड़े हैं और आपातकाल में वह 11 महीने में जेल में भी रहे हैं

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गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस से कड़ी टक्कर के बाद बीजेपी को 99 सीटें मिली हैं जबकि कांग्रेस को 80. एक समय तो कांग्रेस ने बीजेपी को पीछे छोड़ दिया था लेकिन सूरत के इलाके में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन दिखाया और 16 में से 15 सीटें जीत लीं.


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