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2002 का गुजरात दंगा : नरेंद्र मोदी पर लगे थे ये आरोप

2002 में दंगों के दौरान गुजरात पुलिस पर इस मामले में ढिलाई के आरोप लगे थे. तीन दिन तक चली हिंसा में 790 मुस्लिम और 254 हिंदू मारे गए. 223 लोग लापता हो गए.

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2002 का गुजरात दंगा : नरेंद्र मोदी पर लगे थे ये आरोप

गुजरात के सीएम से पीएम उम्मीदवार बनने के बाद वाराणसी में रोडशो (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे
  2. गोधरा में ट्रेन के डिब्बे में श्रद्धालुओं के जलने के बाद हुए दंगे
  3. दंगा में मारे गए ज्यादातर लोग मुस्लिम थे.
नई दिल्ली: गुजरात में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों को लेकर तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट बरकरार रहेगी या नहीं, इस बारे में गुरुवार को गुजरात हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है. जकिया जाफरी की याचिका पर कोर्ट आदेश जारी कर सकती है. 2002 में दंगों के दौरान गुजरात पुलिस पर इस मामले में ढिलाई के आरोप लगे थे. तीन दिन तक चली हिंसा में 790 मुस्लिम और 254 हिंदू मारे गए. 223 लोग लापता हो गए. आरोप लगते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी दंगाइयों को रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई नहीं की. उन्होंने पुलिस दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई न करने के आदेश दिए. यह अलग बात है कि तमाम आरोपों के बाद केंद्र की यूपीए सरकार जो कांग्रेस के नेतृत्व में बनी थी, ने दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था जिसने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी थी.

यह बताना बेहद जरूरी है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई स्पेशिक आरोप नहीं था और न ही है. पीड़ित जकिया जाफरी ने साजिश की बात कही थी और उस दायरे में नरेंद्र मोदी का नाम लिया था. और कहा कि इसमें इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए और जांच होनी चाहिए.

यह भी पढ़ें : गुजरात दंगा : जकिया जाफरी की अर्जी पर हाईकोर्ट ने फैसला टाला

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उल्लेखनीय है कि लोवर कोर्ट ने पहले ही एसआईटी की बातों को सही माना था और जकिया की अपील को खारिज कर दिया था. अब मामला हाईकोर्ट में है. फैसला जो भी यह साफ माना जा रहा है कि इसके आगे की राह सुप्रीम कोर्ट तक जरूर जाएगी.

राज्य में नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के लगभग पांच महीने बाद ही गोधरा रेल हादसे के बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे, जिनमें एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए. इनमें ज्यादातर मुसलमान थे. मोदी पर दंगों को न रोक पाने के आरोप लगे हैं जबकि उनकी सरकार में मंत्री रहीं माया कोडनानी इन्हीं कारणों से 28 साल की सजा भुगत रही हैं.
आलोचक कहते हैं कि दंगों में भूमिका के कारण ही मोदी ने कोडनानी को मंत्री पद से नवाजा था. लेकिन खुद मोदी ने कभी दंगों को लेकर न तो कोई अफसोस जताया है और न ही किसी तरह की माफी मांगी है.
VIDEO: गुजरात दंगों पर अमित शाह की पेशी

बहुत से लोग उन्हें एक कुशल प्रशासक मानते हैं जो भ्रष्टाचार से मुक्त है. याद है कि उस वक्त दंगों के कारण भारतीय जनता पार्टी पर मोदी को सीएम पद हटाने का दबाव था लेकिन इसके चंद महीनों के बाद जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे.


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