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गुजरात : पीएम मोदी की सबसे बड़ी ताकत ही बीजेपी के लिए बन रही है अब परेशानी का सबब, कैसे पार पाएगी इन चुनौतियों से

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं. कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं. लेकिन उनके भाषणों में पहले जैसा जादू नजर नहीं आ रहा है. उनकी बातों में कुछ भी नयापन नहीं है.

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गुजरात :  पीएम मोदी की सबसे बड़ी ताकत ही बीजेपी के लिए बन रही है अब परेशानी का सबब, कैसे पार पाएगी इन चुनौतियों से

गुजरात में पीएम मोदी के ही सहारे है बीजेपी

खास बातें

  1. पीएम मोदी को भाषण में दिख रहा हो दुहराव
  2. भाषणोंं में भी कुछ भी नयापन नहीं
  3. पीएम मोदी के ही सहारे है बीजेपी
गांधीनगर:

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी  के बदले अंदाज ने गुजरात में बीजेपी को सकते में डाल दिया है. वहीं ओबीसी, एसटी और एससी एकता मंच के नेता अल्पे ठाकोर ने भी कांग्रेस में जाने का ऐलान कर दिया. अल्पेश के पास पिछड़ी जातियों का अच्छा खासा समर्थन है. इसके अलावा पाटीदार आंदोलन से जुड़े नेता भी बीजेपी के खिलाफ हैं. हालांकि इस आंदोलन के चेहरा रहे हार्दिक पटेल के दो करीबी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. वहीं जीएसटी से परेशान व्यापारी भी बीजेपी से बेहद नाराज हैं. बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच बीजेपी को भी लग रहा है कि कहीं इस बार गुजरात हाथ से निकल न जाए. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं. कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं. लेकिन उनके भाषणों में पहले जैसा जादू नजर नहीं आ रहा है. उनकी बातों में कुछ भी नयापन नहीं है. वडोदरा में हुआ रोडशो भी उनकी छवि के मुताबिक काफी फीका रहा है. बीजेपी के सामने गुजरात इसलिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि यह पीएम मोदी का गृह राज्य है और इसका असर सीधा लोकसभा चुनाव में दिखेगा और गुजरात का गढ़ बचाए रखने के लिए बीजेपी को इन बड़ी चुनौतियों से पार पाना होगा. 

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पीएम मोदी के भाषण में दोहराव
एक दौर था जब नरेंद्र मोदी कुछ भी बोलते थे तो जनता उसका स्वागत तालियों से करती थी और पूरी जनसभा मोदी-मोदी की नारों से गूंजती थी. लेकिन पिछले तीन सालों से मोदी वही बातें बता रहे हैं.  उनकी बातों में दोहराव नजर आ रहा है. कई जगह तो भाषण के बीच में ही जनता मैदान छोड़कर जाती दिखाई दी है. बीजेपी के सामने दिक्कत यह है कि वह पीएम मोदी को चेहरा बनाए बिना गुजरात में चुनाव जीतने की कल्पना भी नहीं कर सकती है. वहीं पीएम मोदी के भाषणों में भी अब नए तंज, व्यंग नजर नहीं आ रहा है जिसके वह माहिर हैं. वहीं दूसरी ओर आक्रमक राहुल गांधी मंच से नए शब्द गढ़ रहे  हैं. कभी यह क्षमता सिर्फ मोदी के पास ही थी. 

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शाह- मोदी की जोड़ी न होने का भी असर
सबसे बड़ी बीजेपी की प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात में 15 सालों में पहली बार ऐसा होगा जब मुख्यमंत्री पद का चेहरा नरेंद्र मोदी नहीं होंगे. इसमें कोई दो राय नहीं है कि गुजराती अस्मिता की बात करने वाले नरेंद्र मोदी के कांग्रेस के हर नेता पर भाषणों के मामले में भारी पड़ जाते हैं. लेकिन इस बार गुजरात में बीजेपी कार्यकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही होगी कि मोदी नहीं होंगे.

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पाटीदारों को साधना बड़ी चुनौती 
गुजरात में पाटीदार आरक्षण के मुद्दे पर नाराज हैं. 2 साल पहले हार्दिक पटेल की अगुवाई में शुरू हुए आंदोलन की आग ने बीजेपी की सत्ता को झुलसा चुका है. जिसके चलते आनंदी बेन पटेल को अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ गई थी. पाटादारों का वोट प्रतिशत 20 फीसदी है जो अभी तक बीजेपी के ही समर्थक रहे हैं. लेकिन आरक्षण की मांग ने काफी संख्या में पाटीदारों को बीजेपी से अलग कर दिया है. देखने वाली बात यह होगी कि बीजेपी कितने प्रतिशत तक तक को अपने पाले में बचाए रख पाती है. 

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दलितों के साथ मारपीट की घटनाएं
गाय को लेकर ऊना में दलितों के साथ हुई मारपीट के बाद से दलितों में गुस्सा है. कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाना चाहती है. कांग्रेस के नेता पीड़ित परिवार से भी मिल चुके हैं. इसके अलावा राज्यो में और भी घटनाएं हुई हैं. जिससे दलित समुदाय अच्छा खासा नाराज है. 

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क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में कांग्रेस
नरेंद्र मोदी के रहते गुजरात में क्षेत्रीय पार्टियों का उतना वजूद नहीं रह गया था. लेकिन स्थानीय मुद्दों को लेकर अब यह दल मजबूत हो रहे हैं और हो सकता है बीजेपी से नाराजगी के चलते कांग्रेस के साथ चले जाएं जो अभी तक कांग्रेस का ही वोट काटते रहे हैं. 

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बाढ़ न बिगाड़ दे काम
गुजरात की बाढ़ ने इस बार काफी नुकसान किया है. सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे हालात में कई बार लोग सरकार और प्रशासन से नाराज हो जाते हैं. वहीं किसानों पहले ही उपज का सही मूल्य ने मिलने से नाराज थे. अब बाढ़ की वजह से और हालत खराब हो गई है. 


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