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गुजरात में कांग्रेस में कुनबा बचाने के लिए जद्दोजहद, पार्टी टूटने का खतरा

कांग्रेस ने अपने उन विधायकों की मीडिया के सामने परेड कराई जिनके भाजपा में जाने की अटकलें चल रही हैं, दो एमएलए रहे नदारद

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गुजरात में कांग्रेस में कुनबा बचाने के लिए जद्दोजहद, पार्टी टूटने का खतरा

गुजरात कांग्रेस ने मीडिया के सामने पार्टी के एकजुट होने का प्रदर्शन किया.

खास बातें

  1. महेन्द्रसिंह वाघेला और पाटीदार नेता राघवजी पटेल मीडिया के सामने नहीं आए
  2. मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होना चाहते हैं शंकरसिंह वाघेला
  3. शंकरसिंह कांग्रेस के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में मौजूद नहीं रहते
अहमदाबाद: गुजरात में कांग्रेस को एकजुट दिखाने की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन पार्टी में कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस जिस तरह के हालात से गुजर रही है उससे पार्टी में टूट का खतरा बरकरार है.   

पार्टी को अटूट दिखाने की भरसक कोशिश करते हुए कांग्रेस ने अपने उन विधायकों की मीडिया के सामने परेड कराई जिनके भाजपा में जाने की अटकलें लग रही थीं. लेकिन उसमें भी 15 में से दो विधायकों की गैरहाजिरी चर्चा का मुद्दा बनी. शंकरसिंह वाघेला के बेटे महेन्द्रसिंह वाघेला और एक अन्य नाराज पाटीदार नेता राघवजी पटेल नहीं आए.

हालांकि पार्टी ने इस पर बचाव किया. विधायक और पार्टी प्रवक्ता शैलेष परमार ने कहा कि महेन्द्रसिंह वाघेला और राघवजीभाई पहले से तय कार्यक्रम की वजह से नहीं आ सके लेकिन टेलीफोन करके बताया है कि वे पार्टी के साथ हैं. नहीं आने वालों में नाराज चल रहे नेता प्रतिपक्ष शंकरसिंह वाघेला के बेटे महेन्द्रसिंह वाघेला की चर्चा ज्यादा रही. बेटे के साथ-साथ शंकरसिंह की नाराजगी की खबरें थम नहीं रही हैं.

सूत्रों की मानें तो शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी अध्यक्ष को हटाने और खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के लिए पार्टी को अल्टीमेटम दिया है. हालांकि पार्टी इससे इनकार कर रही है और एकता की दुहाई दे रही है.

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बताया जाता है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा कर दी है कि सभी मौजूदा विधायकों  को दोबारा टिकट दिया जाएगा. आने वाले दिनों में और उम्मीदवारों की भी घोषणा होगी. ऐसे में शंकरसिंह से नेता मिले भी हैं और उन्हीं की डिमांड पर कांग्रेस उसी लाइन पर आगे जा रही है.

लेकिन फिर भी राजनैतिक हल्कों में चर्चा गर्म है कि शंकरसिंह वाघेला की नाराजगी खत्म नहीं हुई है. यही वजह है कि गुजरात कांग्रेस प्रभारी अशोक गहलोत जैसे वरिष्ठ नेताओं से बैठक के बावजूद महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शंकरसिंह मौजूद नहीं रहते. अटकलें यह भी लग रही हैं कि वे जल्द ही पार्टी तोड़ सकते हैं. ऐसे में विधायकों के शक्ति प्रदर्शन के बाद भी कांग्रेस की मुश्किलें खत्म नहीं होती दिख रहीं.


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