गुजरात में नहीं रहा आरक्षण विरोधी बंद का ज्यादा असर

जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ बंद की मांग सोशल साइट्स पर हो रही थी लेकिन किसी भी संगठन या नेता ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी.

गुजरात में नहीं रहा आरक्षण विरोधी बंद का ज्यादा असर

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

अहमदाबाद:

आरक्षण के विरोध में आहूत राष्ट्रव्यापी बंद को गुजरात में कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई. यहां ज्यादातर बड़े शहरों के कारोबारी प्रतिष्ठान और बाजार खुले रहे. जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ बंद की मांग सोशल साइट्स पर हो रही थी लेकिन किसी भी संगठन या नेता ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी. भले ही बंद के समर्थन वाला संदेश सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से घूम रहा हो लेकिन लोगों ने उसे तवज्जो नहीं दी. एक अधिकारी ने बताया कि इदर और खेडब्रह्मा शहर में दुकानें बंद रहीं लेकिन गुजरात के बाकी शहर बंद से अप्रभावित रहे.

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खेडब्रह्मा के विधायक अश्विन कोतवाल ने दावा किया कि दुकानदार डर की वजह से बंद में शामिल हुए. कांग्रेस विधायक ने कहा , 'मुझे बताया गया है कि दुकानदारों ने डर कर दुकान बंद किया क्योंकि कुछ लोग सोशल मीडिया पर यह संदेश फैला रहे थे कि स्थानीय लोगों ने अगर बंद का समर्थन नहीं किया किया तो उन्हें उसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे.’ राज्य के पुलिस नियंत्रण कक्ष के अनुसार राज्य के किसी भी हिस्से से परेशानी या हिंसक प्रदर्शन की कोई खबर नहीं आई. नियंत्रण कक्ष के पुलिस अधिकारी के मुताबिक सभी बड़े शहरों में स्कूल, कार्यालय और बाजार खुले रहे.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

 
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