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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वडनगर शहर शुमार होगा विशेष टूरिस्ट सर्किट में...

ये पूरा काम पर्यटन मंत्रालय द्वारा 100 करोड़ के खर्च से तैयार किए जा रहे टूरिस्‍ट सर्किट का हिस्सा हैं. इस सर्किट में वडनगर के साथ अंतरराष्‍ट्रीय पुरातत्व स्थल पाटण और सूर्यमंदिर का मोढेरा भी शामिल है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वडनगर शहर शुमार होगा विशेष टूरिस्ट सर्किट में...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फाइल फोटो...

खास बातें

  1. वडनगर स्टेशन का 6 करोड़ के खर्च से मेकओवर हो रहा है.
  2. कंसलटेंट इंजीनियर हिरेन कहते हैं कि वो काफी कुछ दुरूस्त करना चाहते हैं.
  3. हालांकि अब भी शहर में कुछ जगहों पर गंदगी और कुछ इलाके विकास से वंचित हैं.
अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के होमटाउन वडनगर में तेजी से विकास का काम चल रहा है. फिलहाल मुश्किल से दो मीटर गेज ट्रेनें आती हैं, लेकिन जल्द यहां कई ब्रॉड गेज लाइन की ट्रेनें रूका करेंगी. पूरे स्टेशन का 6 करोड़ के खर्च से मेकओवर हो रहा है. इससे उस चाय की दुकान के भी दोबारा अच्छी चलने की उम्‍मीद है, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुरू में परिवार के साथ चाय बेचा करते थे.

कंसलटेंट इंजीनियर हिरेन वाघेला कहते हैं कि वो काफी कुछ दुरूस्त करना चाहते हैं, लेकिन जो चाय की दुकान थी, उसे वैसे ही रखा जाएगा, तभी उसका आकर्षण रहेगा.. प्रधानमंत्री की शुरुआती यादें रहेंगी. अगर उसे भी बदल दिया गया तो वो याद खत्म हो जाएगी.

इस विकास पर शहर के लोग खासकर प्रधानमंत्री के 45 साल के चचेरे भाई अरविंद मोदी कहते हैं, दूसरे शहरों के साथ जुड़ने में बहुत मदद रहेगी. फिलहाल यहां के लोगों को दूर के बडे़ शहरों में जाने के लिए पहले महेसाणा जाना पडता है और फिर वहां से ट्रेन मिलती है. ब्रॉडगेज बन गया तो वडनगर से ही ट्रेन मिल जाया करेगी.

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ये पूरा काम पर्यटन मंत्रालय द्वारा 100 करोड़ के खर्च से तैयार किए जा रहे टूरिस्‍ट सर्किट का हिस्सा हैं. इस सर्किट में वडनगर के साथ अंतरराष्‍ट्रीय पुरातत्व स्थल पाटण और सूर्यमंदिर का मोढेरा भी शामिल है. वडनगर का एक और आकर्षण पिछले दिनों पुरातत्व विभाग द्वारा खोजा गया प्राचीन बौद्ध मठ भी होगा. साथ ही महज 30,000 की बस्तीवाले शहर में 450 करोड़ के खर्च से एक अत्याधुनिक हॉस्पिटल भी बनेगा. 

हालांकि अब भी शहर में कुछ जगहों पर गंदगी और कुछ इलाके विकास से वंचित हैं. ऐसे में कुछ शहरी ये भी मानते हैं कि विकास की योजनाएं तो बन रही हैं, लेकिन शहर की शक्‍ल नहीं बदल रही और उसमें भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन आशंकाओं के बीच शहर को वीआईपी शहर होने के फायदे साफ नजर आते हैं.


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