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गुजरात में शेरों को घातक विषाणु से बचाने के लिए टीकाकरण शुरू, अब तक हो चुकी है 23 की मौत

जूनागढ़ जिला वन विभाग के सरकारी ट्विटर हैंडल पर जूनागढ़ वन्यजीव के मुख्य वन संरक्षक ने ट्वीट किया, ‘‘मानक प्रोटोकोल के अनुसार सघन पशुचिकित्सा के तहत अलग किये गये शेरों का टीकाकरण आरंभ हुआ है.

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गुजरात में शेरों को घातक विषाणु से बचाने के लिए टीकाकरण शुरू, अब तक हो चुकी है 23 की मौत

फाइल फोटो

अहमदाबाद:

गुजरात के वन विभाग ने गिर अभयारण्य में शेरों को घातक विषाणु से बचाने के लिए रविवार को टीकाकरण शुरु किया किया. इसी विषाणु की वजह से हाल ही में कई शेरों की जान चली गयी. वन अधिकारियों ने बताया था कि इस अभयारण्य में एक महीने से भी कम समय में 23 शेरों की मौत हो गयी थी. उनमें से ज्यादातर शेर ‘कैनाइन डिस्टेंपर’ विषाणु (सीडीवी) और प्रोटोजोआ संक्रमण से मरे. सीडीवी बड़ा ही घातक विषाणु समझा जाता है और पूर्वी अफ्रीका के जंगलों में अफ्रीकी शेरों की आबादी में 30 फीसद गिरावट के लिए उसे ही जिम्मेदार माना जाता है.    

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जूनागढ़ जिला वन विभाग के सरकारी ट्विटर हैंडल पर जूनागढ़ वन्यजीव के मुख्य वन संरक्षक ने ट्वीट किया, ‘‘मानक प्रोटोकोल के अनुसार सघन पशुचिकित्सा के तहत अलग किये गये शेरों का टीकाकरण आरंभ हुआ है. शीर्ष राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शेर विशेषज्ञों की राय ली गयी है. सरकार शेरों की सुरक्षा के लिए फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है.’’ गिर अभयारण्य जूनागढ़ वन विभाग के क्षेत्राधिकार में ही आता है.


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गांधीनगर में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि जो शेर वन विभाग के संरक्षण में हैं, फिलहाल केवल उन्हें ही टीका लगाया जा रहा है. 

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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