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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आवेदन पर अदालत ने ईडी से मांगा जवाब

विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने जांच एजेंसी को सिंह एवं अन्य आरोपियों के आवेदन पर पांच अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आवेदन पर अदालत ने ईडी से मांगा जवाब

वीरभद्र सिंह की याचिका पर कोर्ट ने मांगा जबाव

शिमला:

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से घिरे हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा कुछ खास कागजात मांगे जाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से दो हफ्ते में जवाब मांगा है. विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने जांच एजेंसी को सिंह एवं अन्य आरोपियों के आवेदन पर पांच अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अन्य आरोपियों में वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान आदि शामिल हैं. ईडी की ओर से पेश विशेष सरकारी वकील एन के मट्टा और नीतेश राणा ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से छह हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने कहा कि छह हफ्ते का समय बहुत अधिक होगा और उसने बस दो हफ्ते का समय दिया. सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा दाखिल आवेदनों की प्रतियां ईडी की ओर से वकील सामवेदना वर्मा ने प्राप्त कीं.

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आरोपियों ने अदालत से कहा था कि उन्हें आरोपपत्र के साथ संलग्न कई दस्तावेज नहीं मिले हैं और जो कागजात उपलब्ध कराये गये हैं, उन्हें पढ़ा नहीं जा सकता. इसी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज एक अन्य मामले में पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, चौहान आदि के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया गया है. सीबीआई ने दावा किया था कि वीरभद्र सिंह ने करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी जो संप्रग सरकार में मंत्री रहने के दौरान उनकी कुल आयु के समानुपातिक नहीं है. ईडी ने सीबीआई मामले के आधार पर यह मामला दर्ज किया है.

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गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही  दिल्ली की एक अदालत ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जमानत दे दी थी.  विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने 50,000 रूपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर विक्रमादित्य सिंह को राहत दी. अदालत ने आरोपी पर कई शर्तें भी लगायी जिनमें बिना पूर्व अनुमति के देश छोड़ कर नहीं जाना और मामले में किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करना शामिल है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुये विशेष लोक अभियोजक एनके मट्टा और नीतेश राणा ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा था कि आरोपी रिहा होने का गलत फायदा उठा सकता है.

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ध्यान हो कि अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में 24 जुलाई को विक्रमादित्य सिंह और अन्य को समन जारी किया था और 27 अगस्त को हाजिर होने को कहा था. मामले में विक्रमादित्य सिंह के खिलाफ ईडी द्वारा 21 जुलाई को दायर किये गये आरोपपत्र पर अदालत सुनवाई कर रही थी. इस मामले में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. आरोपपत्र में तरानी इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक वकामुल्ला चंद्रशेखर और राम प्रकाश भाटिया का नाम भी आरोपी के तौर पर शामिल है. (इनपुट भाषा से) 


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