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हरियाणा के मिर्चपुर गांव में दलितों पर फिर हमला, 9 घायल, 40 परिवार गांव छोड़कर गए

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हरियाणा के मिर्चपुर गांव में दलितों पर फिर हमला, 9 घायल, 40 परिवार गांव छोड़कर गए

मिर्चपुर गांव से सीआरपीएफ जवानों को पिछले माह ही हटाया गया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

हिसार (हरियाणा):

छह साल महीने अंतरजातीय हिंसा में दो दलितों को मार दिए जाने की घटना के बाद एक बार फिर हरियाणा के मिर्चपुर गांव में दलित उत्‍पीड़न की घटना सामने आई है. इस बार गांव में किसी मुद्दे पर कहासुनी हो जाने के बाद लगभग 20 लोगों द्वारा किए गए कथित हमले में करीब नौ दलित घायल हो गए. इस मामले के बाद गांव से दलित समुदाय के करीब 40 परिवार घर छोड़कर चले गए हैं.

उल्‍लेखनीय है कि इस गांव से सीआरपीएफ के जवानों को पिछले ही माह हटाया गया है. ये बल छह साल पहले अंतरजातीय हिंसा में दो लोगों को जिंदा जला दिए जाने के बाद से तैनात थे.

पुलिस ने कहा कि सोमवार रात को ग्रामीण एक साइकिल शो देख रहे थे. तभी वहां मौजूद लोगों ने रेस जीतने वाले एक दलित युवा पर कथित तौर पर जाति संबंधी टिप्पणी कर दी. पुलिस ने कहा कि जब दलितों ने इस पर आपत्ति जताई तो दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया.

उन्होंने कहा कि घटना के बाद बड़ी संख्या में दलित मिर्चपुर पुलिस चौकी के बाहर एकत्र हो गए और उन्होंने प्रदर्शन करते हुए पुलिस के खिलाफ नारे लगाए. घटना की जानकारी मिलने पर रात के वक्‍त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा और उपायुक्त निखिल गजराज ने अन्य अधिकारियों एवं पुलिसबल के साथ गांव में पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की.


एसपी ने कहा कि गांव में हालात नियंत्रण में है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए और पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मिर्चपुर चौकी के प्रभारी का तबादला कर दिया गया है. एसपी मीणा ने कहा कि एक घायल व्यक्ति को अगरोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जबकि हल्की चोटों से घायल पांच अन्य को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इस बाबत नारनौंद पुलिस चौकी में 15 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 148 (दंगा करना), 149 (अवैध तरीके से एकत्र होकर अपराध करना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 324 (जानबूझकर खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाना) और एससी/एसटी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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इस मामले में पीडि़त पक्ष की तरफ से वकील रजत कलसन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि 'हम इस मामले में गांव में जाकर पहले तथ्‍यों की जांच करेंगे तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर गांव में दोबारा से सीआरपीएफ तैनात किए जाने, पीडि़तों को पुलिस सुरक्षा उपलब्‍ध कराने तथा मामले की किसी स्‍वतंत्र एजेंसी से जांच किए जाने की मांग करेंगे'.

मिर्चपुर गांव में लगभग सात साल पहले अंतरजातीय हिंसा में दो लोगों को जिंदा जला दिया गया था. इसके बाद गांव में शांति कायम करने के लिए सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था, लेकिन पिछले ही साल उन्हें हटा लिया गया. (इनपुट एजेंसी से भी)
 



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