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Hockey World Cup: भारत का पहला मैच दक्षिण अफ्रीका से, 43 साल से मेडल नहीं जीत पाया है भारत

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Hockey World Cup: भारत का पहला मैच दक्षिण अफ्रीका से, 43 साल से मेडल नहीं जीत पाया है भारत

हॉकी वर्ल्‍डकप 2018 में भारतीय टीम की अगुवाई मनप्रीत सिंह कर रहे हैं

खास बातें

  1. 1975 के वर्ल्‍डकप में चैंपियन बना था भारत
  2. टीम उसके बाद से कोई पदक नहीं जीत पाई है
  3. 1982 के वर्ल्‍डकप में टीम रही थी पांचवें स्‍थान पर
भुवनेश्वर:
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आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय टीम जब कलिंगा स्टेडियम पर दर्शकों की जबर्दस्त हौसलाअफजाई के बीच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बुधवार को मैदान में उतरेगी तो उसका इरादा हॉकी वर्ल्‍डकप (Hockey World Cup) में 43 साल से पदक नहीं जीत पाने का मलाल मिटाने का होगा. आठ बार की ओलिंपिक चैम्पियन भारतीय टीम (Indian Hockey Team) 1975 में एकमात्र वर्ल्‍डकप जीती थी जब अजित पाल सिंह और उनकी टीम ने इतिहास रच डाला था.  पूल सी के मुकाबले में मेजबान भारत बुधवार को अपने अभियान का आगाज करेगा. वर्ष 1975 के बाद से एशियाई धुरंधर भारतीय टीम नीदरलैंड, जर्मनी, पाकिस्‍तान और ऑस्ट्रेलिया के स्तर तक पहुंचने में नाकाम रही.पिछले चार दशक से यूरोपीय टीमों ने विश्‍व हॉकी पर दबदबा कायम रखा है. भारत ने 1975 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन मुंबई में 1982 में हुए वर्ल्‍डकप में किया जब वह पांचवें स्थान पर रहा था.

पिछले 43 साल में वर्ल्‍डकप का कोई पदक भारत की झोली में नहीं गिरा है. विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर काबिज भारत इस बार पदक जीतकर उस कसक को दूर करना चाहेगा. वैसे यह उतना आसान भी नहीं होगा क्योंकि उसे दो बार की गत चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, जर्मनी और ओलिंपिक चैम्पियन अर्जेंटीना जैसी टीमों से पार पाना होगा. इसके अलावा अच्छे प्रदर्शन की अपेक्षाओं का भी भारी दबाव हरेंद्र सिंह की टीम पर होगा.

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2010 में दिल्ली में हुए वर्ल्‍डकप में भारत आठवें स्थान पर रहा है. अभी तक नौ देशों ने वर्ल्‍डकप की मेजबानी की है जिनका प्रदर्शन अपनी मेजबानी में अच्छा नहीं रहा है.दो साल पहले लखनऊ में जूनियर टीम को विश्‍वकप दिलाने वाले कोच हरेंद्र सिंह एशियाई खेलों में स्वर्ण बरकरार नहीं रख पाने के कारण दबाव में हैं. उनके लिये यह 'करो या मरो' का टूर्नामेंट है और अच्छा प्रदर्शन नहीं करने पर उनकी नौकरी जा सकती है. हरेंद्र ने कहा,‘एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में मलेशिया से मिली हार से हम उबर चुके हैं. खिलाड़ी आक्रामक हॉकी खेल रहे हैं और अच्छे नतीजे दे सकते हैं. इसके लिये हमें मैच दर मैच रणनीति बनानी होगी. अपने देश में खेलने को हम दबाव नहीं बल्कि प्रेरणा के रूप में लेंगे.'

वीडियो: भारतीय हॉकी टीम के कोच हरेंद्र सिंह से खास बातचीत

हरेंद्र ने वर्ल्‍डकप विजेता जूनियर टीम के सात खिलाड़ियों को मौजूदा टीम में रखा है जबकि कप्तान मनप्रीत सिंह, पीआर श्रीजेश, आकाशदीप सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा भी टीम में हैं. ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह को टीम से बाहर किया गया जबकि स्ट्राइकर एसवी सुनील फिटनेस कारणों से बाहर हैं. सोलह देशों के टूर्नामेंट में भारत, दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम और कनाडा पूल सी में हैं. दुनिया की तीसरे नंबर की टीम बेल्जियम से भारत को सतर्क रहने की जरूरत है जबकि दक्षिण अफ्रीका की रैंकिंग 15 और कनाडा की 11 है. बेल्जियम के खिलाफ मैच पूल चरण में असल चुनौती होगा जिसमें जीतकर भारत सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह बनाना चाहेगा ताकि क्रासओवर नहीं खेलना पड़े. बेल्जियम से सामना दो दिसंबर को और कनाडा से आठ दिसंबर को होगा. 16 साल बाद वर्ल्‍डकप में सोलह टीमें हैं जिन्हें चार चार के पूल में बांटा गया है. हर पूल से शीर्ष टीम क्वार्टर फाइनल में खेलेगी जबकि दूसरे और तीसरे स्थान की टीमें क्रासओवर खेलकर अंतिम आठ में जगह बनाएंगी. पहले दिन शुरुआती मैच में बेल्जियम का सामना कनाडा से होगा. (इनपुट: भाषा)




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