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तेलंगाना : कर्ज से परेशान किसान ने खुदकुशी से पहले कहा, बच्चों का ख्याल रखना

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तेलंगाना : कर्ज से परेशान किसान ने खुदकुशी से पहले कहा, बच्चों का ख्याल रखना

अपने पति की मौत पर आंसू बहाते कनकम्मा

हैदराबाद: जब के परिवार के मुखिया के पास अपने परिवार को खिलाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं हो और भविष्य भी अंधकारमय दिखने लगे तब वह क्या करेगा... 'बच्चों का ख्याल रखना' (तेलगु में 'पिल्लालु पयीलम') ये वह शब्द हैं जो कनकैया ने आखिरी बार अपने घर फोन करके कहा... यह भी सीधे अपने खेत से...

कनकैया अकसर रात में अपने खेतों पर रुक जाता था। दो एकड़ की खेती से उसे काफी लगाव था, लेकिन बिजली और पानी की लगातार आंख मिचोली ने उसे हरा दिया। उस फोन के बाद उसने परिवार से दोबारा बात नहीं की।

किसी खराब आशंका से जब उसकी पत्नी कनकम्मा कुछ लोगों के साथ दौड़े-दौड़े अपने खेतों पर पहुंची तो वहां पर उसके पति की लाश इमली के पेड़ से लटकती मिली।
 

कनकैया के चार बोरवेल फेल हो चुके थे, सभी का खर्चा इस 32 वर्षीय किसान ने कर्जे से उठाया... तीन भैंसों की मौत हो गई क्योंकि वह उन्हें चारा नहीं दे पा रहा था। उन्हें वह बेचने में भी नाकाम रहा।

देश के इस भूभाग में पिछले तीन सालों से लगातार सूखा पड़ने के वजह से किसान बुरी तरह प्रभावित हैं। जब कनकैया के पास अपने दो बेटों को खाना खिलाने की व्यवस्था नहीं हुई तब उसने दूसरे रास्ते भी तलाशे मगर कामयाब नहीं हो पाया।

पत्नी कनकम्मा का कहना है कि पति का बच्चों से काफी लगाव था और उसने परिवार का हमेशा पूरा ख्याल रखा था। सूखे की वजह से किसान के परिवार का आखिरी पैसा भी खर्च हो चुका था। हालात इतने बदतर थे कि कनकैया के अंतिम संस्कार के लिए भी पैसा नहीं बचा था।

कनकम्मा ने रोते हुए बताया कि समाज के और गांव के लोगों ने पैसा एकत्र कर अंतिम संस्कार कराया। घर पर एक भी पैसा नहीं था और मात्र 40 रुपये कनकैया की शर्ट से मिले जो उसने मरते वक्त पहनी थी।

कनकैया की दादी ने एनडीटीवी से बताया कि अपनी पूरी जिंदगी में इस प्रकार का सूखा हमने नहीं देखा। तीन साल से लगातार ऐसा सूखा पड़ा है कि गांव के सभी कुएं सूख गए हैं। कहीं भी पानी नहीं है। हालात ऐसे हैं कि गांव में मनरेगा का काम भी नहीं है। गांव में अगर पानी होता तो मेरे पोते को आत्महत्या नहीं करनी पड़ती।
 

गांव के हालात कुछ ऐसे हैं कि आसपास के सभी खेत भी सूखे पड़े हैं और गांव में कोई भी मजदूरों को काम पर नहीं ले रहा है। कनकम्मा की चिंता यह है कि अब वह क्या काम करेगी, कैसे अपने बच्चों को पालेगी।

फिलहाल परिवार के पास जो कुछ खाने के लिए बचा है वह गांव के लोगों ने कनकैया के क्रियाक्रम के बाद के कुछ संस्कारों के लिए दिया था। कनकम्मा की हालत कुछ इस तरह कि 30 वर्ष की आयु में 43 डिग्री के तापमान में उसे शॉल की जरूरत महसूस हो रही है। वह बहुत कमजोर है।
 

तेलंगाना सरकार ने हर किसान की आत्महत्या पर पांच लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। कनकम्मा का कहना है कि अभी तक उसके पास सरकार की ओर से कोई नहीं आया है जो उसके पति की मौत को दर्ज करे। यह कानूनी रूप से जरूरी है अगर किसी को मुआवजा दिया जाना है।

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सामाजिक कार्यकर्ता कोंडल रेड्डी ने बताया कि राजस्व विभाग के अधिकारी जब तक इस मौत को दर्ज नहीं करेंगे किसान के परिवार को कुछ नहीं मिलेगा। यही वजह है कि सरकार के आंकड़े और पुलिस के किसान के आत्महत्या के आंकड़ों में इतना फर्क होता है। यही वजह है कि किसानों के लिए हक के लिए लोगों को लड़ना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि तीन साल पहले जब तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था तब से अब तक 2100 किसान आत्महत्या कर चुके हैं और अब तक केवल 300 किसानों को ही मुआवजा दिया गया है। आज कनकम्मा की दयनीय स्थिति यही कह रही है, वह कहती है कि दया के लिए भी हमें दूसरों पर निर्भर हैं।


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