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कैसे बनेगी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था, 10 प्वाइंट्स में समझें मोदी-2 सरकार का पहला आर्थिक सर्वे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को संसद में पेश 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिये आर्थिक वृद्धि को गति, मांग, निर्यात और रोजगार सृजन पर जोर देने की बात कही गयी है.

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कैसे बनेगी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था, 10 प्वाइंट्स में समझें मोदी-2 सरकार का पहला आर्थिक सर्वे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण- (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: समीक्षा में कहा गया है कि ये वृहत आर्थिक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में पिछले पांच वर्ष से लगातार गिरावट आ रही है. संसद में बृहस्पतिवार को पेश 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान अर्थव्‍यवस्‍था अधिक एवं परिवर्तनीय मुद्रास्फीति के बजाय अपेक्षाकृत ज्‍यादा स्थिर एवं कम मुद्रास्फीति की ओर अग्रसर हो गई है.
आर्थिक सर्वेक्षण की 10 खास बातें-
  1. वित्त वर्ष 2018-19 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत पर आ गई है. सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष 2017-18 में 3.6 प्रतिशत, 2016-17 में 4.5 प्रतिशत, 2015-16 में 4.9 प्रतिशत और 2014-15 में 5.9 प्रतिशत के स्तर पर थी. समीक्षा में बताया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल 2018 में 4.6 प्रतिशत थी, जो अप्रैल, 2019 में 2.9 प्रतिशत पर आ गई है.
  2.  आर्थिक समीक्षा के अनुसार, उपभोक्‍ता खाद्य मूल्‍य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित खाद्य महंगाई दर वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान घटकर 0.1 प्रतिशत के निम्‍न स्‍तर पर आ गई. मुद्रास्फीति दर 2018-19 में 4.3 प्रतिशत रही है. यह वर्ष 2016-17 में 1.7 प्रतिशत, 2015-16 में शून्य से 3.7 प्रतिशत नीचे और 2014-15 में 1.2 प्रतिशत के स्तर पर थी. आर्थिक समीक्षा के अनुसार देश में खाद्य मुद्रास्फीति निम्‍न स्‍तर पर बरकरार रही है.
  3. खाद्य महंगाई दर अप्रैल, 2019 में 1.1 प्रतिशत आंकी गई, जबकि यह मार्च, 2019 में 0.3 प्रतिशत और अप्रैल, 2018 में 2.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी. समीक्षा में यह बात रेखांकित की गई है कि वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति में भारी कमी मुख्‍यत: सब्जियों, फलों, दालों एवं उत्‍पादों, चीनी और अंडे की कीमतों में भारी गिरावट के कारण ही संभव हो पाई है.
  4. 2017-18 के दौरान बाजार में रुपये की विनिमय दर 65-68 प्रति डॉलर पर रही, लेकिन 2018-19 में रुपया डॉलर के मुकाबले हल्का हो कर 70-74 तक चला गया था. रुपये में गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल में उछाल की वजह से रही. समीक्षा के अनुसार भारत की आयात क्रय क्षमता लगातार बढ़ रही है क्योंकि निर्यात की तुलना में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी कम रही है.
  5. समीक्षा के अनुसार 2018 के दिसंबर में भारत का विदेशी बकाया ऋण 521.1 अरब डॉलर था जो मार्च, 2018 की तुलना में 1.6 प्रतिशत कम है. दीर्घावधि का विदेशी बकाया ऋण 2018 के दिसंबर में 2.4 प्रतिशत घटकर 417.3 अरब डॉलर रहा गया. हालांकि देश के कुल विदेशी बकाया ऋण में इसकी हिस्सेदारी पिछले वर्ष की समान अवधि के 80.7 प्रतिशत के लगभग बराबर 80.1 प्रतिशत रही.
  6. 2018-19 में देश से कुल 330.7 अरब डॉलर मूल्य वस्तुओं का निर्यात हुआ. इनमें सबसे ज्यादा पेट्रोलियम उत्पादों, कीमती पत्थरों, दवाओं, सोने और अन्य कीमती धातुओं का निर्यात शामिल है. इस अवधि में देश में कुल 514.03 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात किया गया. आयातित वस्तुओं में कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, मोती, कीमती और अर्द्ध-कीमती पत्थर तथा सोना प्रमुख रहे.
  7. समीक्षा में आर्थिक वृद्धि के बारे में कहा गया है, ‘‘चालू वित्त वर्ष 2019-20 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है. बीते वित्त वर्ष में पूरे साल वृद्धि दर के निचले स्तर पर रहने के बाद यह अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार का संकेत है.'' इसमें 2018-19 में राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. अंतरिम बजट में भी राजकोषीय घाटा 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था.
  8. जनसंख्या प्रवृत्ति के बारे में आर्थिक समीक्षा में बुजुर्ग आबादी के लिये तैयारी की जरूरत पर बल दिया है. इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश में वृद्धि के साथ चरणबद्ध तरीके से सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया है. इसके अलावा आर्थिक समीक्षा में छोटी कंपनियों के बजाए बड़ी कंपनी बनने की क्षमता रखने वाली नई कंपनियों को बढ़ावा देने के लिये नीतियों को नई दिशा देने का भी आह्वान किया गया है.
  9. वार्षिक आर्थिक समीक्षा में देश की अर्थव्यवस्था 2024-25 तक 5,000 अरब डालर पहुंचाने के लिये 8 प्रतिशत की दर से जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि हासिल करने और निवेश बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024-25 तक अर्थव्यवस्था का आकार 5,000 अरब डालर पहुंचाने का महत्वकांक्षी लक्ष्य रखा है.
  10. आर्थिक समीक्षा में आयात-निर्यात, विनिमय दर और चालू खाते के घाटे (कैड) जैसे बाह्य क्षेत्र के मोर्चों पर देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत तस्वीर पेश की गयी है. समीक्षा के अनुसार वैश्विक उत्पादन बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव होगा, लेकिन इसके बावजूद इसका असर भारत पर नहीं पड़ेगा क्योंकि वैश्विक उत्पादन में वृद्धि भारत के निर्यात में भी सहायक बनेगी. सरकार की नीतियों के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में और उदार बनने की संभावना है, जिससे चालू खाते के घाटे को पाटने वाले संसाधन और स्थिर होंगे. अगर खपत में कमी आती है और निवेश तथा निर्यात से अर्थव्यवस्था को गति मिलती है तो चालू खाते के घाटे को कम किया जा सकता है.



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