यह ख़बर 30 जुलाई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

फारूक और बेनी समेत 16 पूर्व मंत्रियों ने नहीं खाली किए सरकारी बंगले

फारूक और बेनी समेत 16 पूर्व मंत्रियों ने नहीं खाली किए सरकारी बंगले

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

पूर्ववर्ती संप्रग सरकार में मंत्री रहे प्रमुख नेताओं द्वारा सरकारी बंगलों को खाली नहीं किए जाने का मामला बुधवार को लोकसभा में उठा और सरकार ने बताया कि फारूक अब्दुल्ला, जयपाल रेड्डी और अजित सिंह समेत 16 पूर्व मंत्रियों ने अभी तक सरकारी बंगलों को खाली नहीं किया है।

लोकसभा सदस्यों अनुराग ठाकुर, पीसी गडीगौदार तथा हुकुम देव नारायण यादव ने सदन में यह मामला उठाया और सरकार से ऐसे सरकारी अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों की जानकारी मांगी जिन्होंने तय समय अवधि के बाद भी बंगलों को खाली नहीं किया है।

शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने सदस्यों के सवालों के लिखित जवाब में जानकारी देते हुए बताया कि डॉ फारूक अब्दुल्ला, जयपाल रेड्डी, अजित सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, डॉ गिरिजा व्यास, एमएम पल्लम राजू, कृष्णा तीरथ, श्रीकांत कुमार जेना, सचिन पायलट, जितेन्द्र सिंह, प्रदीप जैन, पी बलराम नाइक, किल्ली कुरूपारानी, लालचंद कटारिया और माणिकराव होड्ल्या गावित ने सरकारी बंगलों को खाली नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि ये सभी पूर्व मंत्री 26 जून 2014 से इन बंगलों में अनधिकृत तौर पर रह रहे हैं तथा इन पर नुकसान की भरपाई के लिए शुल्क भी लगाया जा रहा है।

नायडू ने इसके साथ ही बताया कि गुलाम नबी आजाद, एके एंटनी, एम वीरप्पा मोइली, वायलार रवि, मल्लिकाजरुन खड़गे, के रहमान खान, राजीव शुक्ला, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत लोकसभा और राज्यसभा के 21 सांसदों को सलाह दी गई है कि वे अपने अपने पूल से बंगलों के आवंटन के लिए आवास समिति से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि इन सभी पूर्व मंत्रियों को 15 दिन का समय दिया गया है और इस अवधि तक उनसे नुकसान की भरपाई के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य अनुपूरक सवाल के जवाब में बताया कि पूर्व मंत्रियों के अलावा बहुत से ऐसे सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हैं जो सालों से सरकारी फ्लैटों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

सरकार द्वारा सदन के पटल पर रखे गए आंकड़ों से पता चलता है कि धर्मसिंह नामक एक कर्मचारी एक मार्च 1993 से फ्लैट में अनधिकृत तौर पर रह रहा है और उस पर 21 लाख, 36 हजार, दो सौ 46 रुपये का नुकसान शुल्क लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में टाइप वन के फ्लैटों में 207 कर्मचारी अधिकारी अनधिकृत रूप से रह रहे हैं। रघुवीर सिंह भी एक ऐसा ही कर्मचारी है जो 1996 से फ्लैट में अनधिकृत रूप से रह रहा है।

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नायडू ने बताया कि टाइप-2 श्रेणी में 176 अधिकारी, टाइप-3 में 140, टाइप-4 में 97, टाइप-4 स्पेशल में 24, डी-। में दस, सी-2 में 12 तथा सी-। में 3 अधिकारी अनधिकृत रूप से रह रहे हैं।