यूपी विधानसभा चुनाव : मुलायम सिंह को किनारे करके जेडीयू और राष्ट्रीय लोकदल ने मिलाया हाथ

यूपी विधानसभा चुनाव : मुलायम सिंह को किनारे करके जेडीयू और राष्ट्रीय लोकदल ने मिलाया हाथ

खास बातें

  • गठबंधन की बातचीत की शुरुआत सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने की थी
  • बाद में मुलायम सिंह ने विलय का प्रस्ताव रखा जो स्वीकार्य नहीं था
  • जेडीयू ने कहा यह गठबंधन बीजेपी को रोकने के लिए है
लखनऊ:

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने पश्चिमी उत्तरप्रदेश में अपना प्रभाव रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजित सिंह से हाथ मिलाया है. यह गठबंधन मुलायम सिंह को किनारे पर रखते हुए किया गया है.

दोनों पार्टियों के नेताओं ने कहा कि मूल रूप से गठबंधन की बातचीत की शुरुआत सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने की थी, लेकिन बाद में उन्होंने भागीदारी के बजाय विलय का प्रस्ताव रखा जो स्वीकार्य नहीं था. जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, "यह गठबंधन बीजेपी को रोकने के लिए किया गया है." उन्होंने यह भी कहा, "हम समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ नहीं करना चाहते."

पिछले वर्ष, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीयू, राजद, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 'महागठबंधन' बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन बाद में मुलायम सिंह महागठबंधन से यह कहते हुए अलग हो गए थे कि उनकी पार्टी को बहुत कम सीटे दी जा रही हैं. हालांकि मुलायम सिंह का यह फैसला पार्टी के हित में नहीं रहा और पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी.

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उत्तर प्रदेश में सत्ता में बने रहने के लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सितंबर में गठबंधन की बात की थी लेकिन बाद में उन्होंने कोई सक्रियता नहीं दिखाई. चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ मुलायम सिंह यादव की मुलाकात ने जेडीयू और राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेताओं को नाराज कर दिया. वही, अजित सिंह ने कहा कि कांग्रेस की ओर से अभी तक गठबंधन का कोई आमंत्रण नहीं मिला है.
 
गौरतलब है कि पिछले माह सपा परिवार का झगड़ा बहुत सुर्खियों में रहा था जिसमें अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच खुलकर तनातनी देखने को मिली थी. हालांकि, जब अखिलेश ने अपना कैंपेन शुरू किया तो पूरा परिवार एक साथ नजर आया और तीनों ने दावा किया कि पारिवारिक विवाद को सुलझा लिया गया है. लखनऊ में सपा के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में नीतिश कुमार शामिल नहीं हुए थे. न ही कांग्रेस का कोई नेता नजर आया था.

ध्यान रहे कि 2012 में आयोजित विधानसभा चुनाव में 405 सीटों में से जेडीयू को एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि अजित सिंह की पार्टी ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी.