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सीमा पर खूफिया तंत्र की मजबूती के लिए केंद्र सरकार उठाने जा रही है बड़ा कदम

भारत पूर्वी सीमा पर सड़कों और सैन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण कर अपना रक्षा मजबूत करने में जुटा है.

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सीमा पर खूफिया तंत्र की मजबूती के लिए केंद्र सरकार उठाने जा रही है बड़ा कदम

एसएसबी से 2000 जवान आईबी ट्रांसफर किए जाएंगे

खास बातें

  1. ट्रांसफर का तैयार हो चुका है ब्लू प्रिंट
  2. एसएसबी की नागरिक शाखा के जवान होंगे ट्रांसफर
  3. इन जवानों ने पहले भी किया है इन इलाकों में काम
नई दिल्ली: सीमा सशस्त्र बल के 2000 से अधिक कर्मी पूर्वी सीमा पर खुफिया ब्यूरो (आईबी) में ट्रांसफर किए जाने की तैयारी चल रही है. गौरतलब है कि भारत पूर्वी सीमा पर सड़कों और सैन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण कर अपना रक्षा मजबूत करने में जुटा है. मिली जानकारी के मुताबिक एसएसबी के नागरिक संवर्ग की कुल 2,765 चौकियां अगले सालभर में आईबी की कमान में आ जाएंगी. उनमें से 2,039 चौकियां अभी चालू हैं. इस बारे में उपलब्ध ब्लूप्रिंट में कहा गया है, 'एसएसबी की नागरिक शाखा आईबी के हवाले की जाएगी, उसके भंडार और अन्य चीजें जैसे जमीन, भौतिक बुनियादी ढांचे उपकरण आदि आईबी के कमान में होंगे.'

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इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी रखने वाले एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि श्रमबल और बुनियादी ढांचे को अंतरित करने का 300 पन्नों का प्रस्ताव यहां एसएसबी मुख्यालय में तैयार किया गया और उसका गृह मंत्रालय एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय ने क्रियान्वयन के संदर्भ में मूल्यांकन किया. उन्होंने बताया कि एसएसबी की नागरिक इकाई के श्रमबल, जिसे मृतप्राय बताया जाता है क्योंकि उसमें प्रोन्नति और कार्य मौके नहीं हैं, को पूर्वी सीमा पर आईबी की उपस्थिति बढ़ाने के लिए तैनात किया जाएगा जहां इन अधिकारियों ने लंबे वक्त तक काम किया है.

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अधिकारी ने बताया कि इन कर्मियों की औसत उम्र 50 से अधिक है ओर उन्होंने नेपाल एवं भूटान सीमाओं पर रहने वाले लोगों के साथ बहुत काम किया है. उन्होंने उन्हें न केवल मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया बल्कि वे एसएसबी की आंख एवं कान बने रहे. भारत चीन युद्ध के करीब सालभर बाद इस संवर्ग को सीमावर्ती क्षेत्रों में काम करने तथा स्थानीय लोगों के बीच राष्ट्रीय अपनत्व एवं भारत समर्थक भावना जगाने के लिए पहली बार गठित किया गया था. उसने 2001 तक रिसर्च एंड एनालायसिस रॉ के तहत स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से काम किया. 1999 के कारगिल युद्ध के बाद इस बल का नाम 2003 में बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया गया. उस पर भारत नेपाल और भारत भूटान सीमा की चौकसी करने का जिम्मा डाला गया. अधिकारी ने कहा, 'नागरिक एसएसबी कैडर का अंतरण बल के दीर्घ प्रतीक्षित पुनर्संरचना को मंजूरी मिलने के बाद शुरु होगा और लागू होगा. इसमें करीब एक साल लगेगा.'


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