भारत में बीते 25 सालों में मारे जा चुके हैं 27 पत्रकार

सबसे ज्यादा राजनीतिक या फिर क्राइम कवर करने वाले पत्रकारों की हत्या हुई है.

भारत में बीते 25 सालों में मारे जा चुके हैं 27 पत्रकार

पत्रकार गौरी लंकेश ( फाइल फोटो )

खास बातें

  • बीते 25 सालों में मारे जा चुके हैं 27 पत्रकार
  • ज्यादातर राजनीति और क्राइम कवर करने वाले पत्रकार
  • भारत में सुरक्षित नही हैं पत्रकार
नई दिल्ली:

बेंगलुरु में मंगलवार की शाम वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी. इसे के साथ एक बार फिर प्रेस की आजादी का सवाल उठा. देश के तमाम शहरों में पत्रकारों ने प्रदर्शन किया है. एक वेबसाइट कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के अनुसार भारत में 1992 से अब तक 27 पत्रकारों की हत्या कर दी गई है. इसमें से सबसे ज्यादा राजनीतिक या फिर क्राइम कवर करने वाले पत्रकार बताए जाते हैं. गौरतलब है कि कट्टरता के खिलाफ मुखर आवाज बन चुकीं पत्रकार गौरी लंकेश को बेंगलुरु स्थिति उनके घर के सामने बाइक सवारों ने गोली मार दी थी. शक जताया जा रहा है कि उनको किसी कट्टरपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने मारा है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इसमें नक्सलियों का भी हाथ हो सकता है. उनकी हत्या के बाद से बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.

पढ़ें :  प्रधानमंत्री का किसी को ट्विटर पर फॉलो करना 'चरित्र प्रमाण' पत्र देना नहीं : बीजेपी

वहीं निखिल दधीच नाम के शख्स ने ट्विटर पर गौरी लंकेश के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. इस शख्स को पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद फॉलो करते रहे हैं. हालांकि रविशंकर प्रसाद ने उसको अनफॉलो करते हुए उसकी निंदा की है.

वीडियो : गौरी लंकेश को नक्सलियों से खतरा था?
लेकिन का पीएम का उस शख्स को सोशल मीडिया में फॉलो करने की बात पर अच्छा-खासा विवाद हो चुका है. ट्विटर पर लोगों ने पीएम मोदी की जमकर खिंचाई की है. इसके बाद बीजेपी की ओर से सफाई में कहा गया है कि किसी को ट्विटर पर फॉलो करने के मतलब यह नहीं है कि उसको चरित्र प्रमाणपत्र दे दिया गया है. 
 

 
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com