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कावेरी जल विवाद मामले की सुनवाई अब तीन जजों की बेंच करेगी, अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को

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कावेरी जल विवाद मामले की सुनवाई अब तीन जजों की बेंच करेगी, अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को

सुप्रीम कोर्ट का फाइल फोटो...

खास बातें

  1. जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताव रॉय और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच गठित
  2. कोर्ट 30 सितंबर के आदेश में संशोधन करे- कोर्ट से केंद्र सरकार
  3. केंद्र ने कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का विरोध किया है.
नई दिल्‍ली:

कावेरी जल विवाद मामले की सुनवाई अब तीन जजों की बेंच करेगी. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच का गठन किया गया है. जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताव रॉय और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच 18 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करेगी. पहले मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच कर रही थी.

इससे पहले चार अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड बनाने के मामले को 18 अक्टूबर तक टाल दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को झटका देते हुए कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि सुपरवाइजरी पैनल इलाकों का दौरा कर 17 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दे.

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को 2000 क्यूसेक पानी 7 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक तमिलनाडु को देने का आदेश दिया था.


वहीं,  कावेरी जल विवाद पर केंद्र ने यू-टर्न लेते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोर्ट 30 सितंबर के आदेश में संशोधन करे. केंद्र ने कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का विरोध किया है. सरकार ने कहा कि यह काम संसद का है. बता दें कि कोर्ट ने 30 सितंबर के अपने आदेश में बोर्ड के गठन का आदेश दिया था.

उधर, उच्चतम न्यायालय ने इसी मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक से कहा है कि कर्नाटक कोर्ट के आदेश की अवहेलना बंद करें और सूचित करें कि उसने तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा है या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार द्वारा तमिलनाडु को कावेरी का पानी नहीं देने पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे आदेश का पालन करके अपनी साफ मंशा को सामने लाइए. यह बात तब कही गई जब कर्नाटक ने अदालत द्वारा तय की गई 1 अक्टूबर की तारीख के बाद भी पड़ोसी राज्य तमिलनाडु को पानी नहीं दिया. कोर्ट ने कर्नाटक को आदेश दिए थे कि एक अक्टूबर से अगले छह दिन तक तमिलनाडु को पानी दिया जाए.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को अपने आदेश में कर्नाटक सरकार को लताड़ते हुए तमिलनाडु के लिए 1 से 6 अक्टूबर तक 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था और कहा था कि ऐसे हालात पैदा मत कीजिए कि कानून का गुस्सा टूट पड़े. कोर्ट के आदेशों का पालन होना ही चाहिए.

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र को 4 अक्तूबर तक कावेरी मैनेजमैंट बोर्ड का गठन करने के आदेश दिए थे. कोर्ट ने कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी को शनिवार तक अपने प्रतिनिधियों के नाम केंद्र को देने को कहा था. बोर्ड टीम ही दौरा कर सुप्रीम कोर्ट को 6 अक्तूबर तक रिपोर्ट देगी.

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वहीं, तमिलनाडु की ओर से कहा गया है कि हमारे साथ इस मामले में बुरा बर्ताव किया गया है. हम इस केस में कुछ नहीं कहना चाहते हैं. कोर्ट चाहे जो आदेश करे, राज्य उसे मानने को तैयार है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय मंत्री उमा भारती की देखरेख में दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक का ब्योरा भी सुप्रीम कोर्ट में दिया गया था. दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आगे आकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच सुलह कराने की कोशिश के निर्देश दिए थे.



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