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देश के 13 राज्यों के 306 जिलों में पीने के पानी का संकट, तेज गर्मी से जलाशय सूखे

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देश के 13 राज्यों के 306 जिलों में पीने के पानी का संकट, तेज गर्मी से जलाशय सूखे

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

देश में 13 राज्यों के 306 जिलों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। यानी देश के करीब आधे जिलों में पीने के पानी का संकट है। तेज गर्मी की वजह से जलाशय सूख रहे हैं और पानी का संकट गहराता जा रहा है।

मराठवाड़ा के पैठन में प्रति 5 दिन में जल आपूर्ति
मराठवाड़ा में औरंगाबाद जिले के सबसे बड़े बांध जायकवाड़ी में अब पानी आम इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है। नतीजा यह है कि पैठन तहसील के लोगों को पहले से कम पानी की सप्लाई संभव हो पा रही है। पहले पानी चार दिन में एक बार सप्लाई होता था अब 5 दिन में एक बार सप्लाई होता है, वह भी सिर्फ 40 मिनट के लिए।

देश के आधे जिले समस्या से घिरे
पानी के संकट का दायरा मराठवाड़ा तक सीमित नहीं है। यह संकट तेजी से पूरे देश में बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को संसद में पेयजल मंत्रालय की तरफ से पेश आंकड़ों के मुताबिक देश के 13 राज्यों के 306 जिलों में पेयजल का संकट पैदा हो गया है। देश के करीब आधे जिले पीने के पानी की समस्या से घिर गए हैं।

यूपी को पानी देने के मुद्दे पर सपा ने किया हंगामा
संकट बढ़ रहा है, लेकिन नेता इस पर भी राजनीति करने से नहीं चूक रहे हैं। शुक्रवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसदों ने जमकर हंगामा किया। सपा नेताओं ने रेल मंत्री पर पानी को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि रेल मंत्री ने बयान दिया है कि वे वॉटर ट्रेन बुंदेलखंड भेजना चाहते हैं लेकिन संविधान के मुताबिक केन्द्र सरकार बिना राज्य सरकार की मंजूरी के पानी या कोई दूसरी मदद नहीं भेज सकती।


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बुंदेलखंड भेजी गई खाली ट्रेन
सपा सांसदों ने आरोप लगाया कि खाली ट्रेन बुंदेलखंड भेजी गई। इसके जवाब में रेल मंत्री ने सफाई दी कि जिस राज्य में पानी भेजा जाता है पानी उसी राज्य से लिया जाता है। लातूर का पानी मिराज से भरा गया। बुंदेलखंड से भी ऐसे ही पानी की सप्लाई को लेकर मांग आई थी। इस पर सपा सांसद माने नहीं और वे रेल मंत्री से माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग करते रहे।

मॉनसून एक माह दूर
तेज गर्मी की वजह से जलाशय सूखते जा रहे हैं। मुश्किल यह है कि यह संकट ऐसे वक्त पर खड़ा हुआ है जब लोगों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। मॉनसून अब भी करीब एक महीने दूर है, यानी राहत के लिए लोगों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा।



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