Flashback 2019: अयोध्या विवाद से लेकर राफेल डील तक, सुप्रीम कोर्ट के वो 5 फैसले जो बन गए नजीर

साल 2019 सुप्रीम कोर्ट के तमाम ऐतिहासिक फैसलों के लिए भी जाना जाएगा. कोर्ट ने इस कई ऐसे फैसले सुनाए, जो इतिहास बन गए. आइये एक नजर डालते हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2019 में सुनाए गए 5 अहम फैसलों पर...

Flashback 2019: अयोध्या विवाद से लेकर राफेल डील तक, सुप्रीम कोर्ट के वो 5 फैसले जो बन गए नजीर

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में कई अहम फैसले सुनाए. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली :

साल 2019 सुप्रीम कोर्ट के तमाम ऐतिहासिक फैसलों के लिए भी जाना जाएगा. कोर्ट ने इस कई ऐसे फैसले सुनाए, जो इतिहास बन गए. एक तरफ कोर्ट ने दशकों पुराने तथा पूरे देश को आंदोलित करते रहे अयोध्या जमीन विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मामले का पटाक्षेप किया, तो दूसरी तरफ राफेल डील में भी अहम फैसला सुनाया. कोर्ट का यह फैसला एक तरीके से मोदी सरकार के लिए क्लीन चिट जैसा था. आइये एक नजर डालते हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2019 में सुनाए गए 5 अहम फैसलों पर...

1. दशकों पुराने अयोध्या मामले में फैसला 
दशकों पुराने तथा पूरे देश को आंदोलित करते रहे अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने अयोध्या में विवादित भूमि का कब्ज़ा सरकारी ट्रस्ट को मंदिर बनाने के लिए दे दिया तथा उत्तर प्रदेश के इसी पवित्र शहर में एक 'प्रमुख' स्थान पर मस्जिद के लिए भी ज़मीन आवंटित करने का आदेश दिया. इस केस में वादी भगवान रामचंद्र के बालस्वरूप 'रामलला' को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक दिया गया है. दूसरी तरफ, सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ ज़मीन का एक 'उपयुक्त' प्लॉट दिया जाएगा. न्यायमूर्तियों ने कहा कि ऐसा किया जाना ज़रूरी था, क्योंकि 'जो गलतियां की गईं, उन्हें सुधारना सुनिश्चित करना भी' कोर्ट का उत्तरदायित्व है. 

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2. RTI के दायरे में आएंगे सीजेआई 
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सीजेआई कार्यालय के आरटीआई के दायरे में आने को लेकर भी ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि देश के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार के तहत आएगा. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने सुनाया. इसी साल चार अप्रैल को कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बता दें कि चीफ जस्टिस के दफ्तर को आरटीआई के तहत लाने को लेकर वर्ष 2010 में पहली बार याचिका दायर की गई थी. इस मामले को लेकर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि CJI एक ऐसा पद है जो पब्लिक अथॉरिटी के अंदर आता है. राइट टू इनफार्मेशन और टाइट टू प्राइवेसी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.  

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3. राफेल डील में सरकार को क्लीन चिट 
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल डील का मामला बड़ा मुद्दा बना. विपक्ष ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार को घेरा. चुनावी सभाओं से लेकर चौक-चौराहे और देश-विदेश तक इस मामले की चर्चा हुई. राफेल डील का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन sc से विपक्ष को करारा झटका लगा. कोर्ट ने राफेल विमान सौदे को लेकर दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया. इससे डील में धांधली का आरोप लगा रहे विपक्ष, खासकर कांग्रेस को करारा झटका लगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि राफेल डील मामले में दोबारा किसी तरह की सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट का यह फैसला एक तरीके से मोदी सरकार के लिए क्लीन चिट जैसा था. 

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4. राहुल गांधी को लगाई फटकार 
सुप्रीम कोर्ट ने 'चौकीदार चोर है' टिप्पणी मामले में भी फैसला सुनाया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को फटकार लगाई. दरअसल, राहुल गांधी ने राफेल मामले में न्यायालय के 14 दिसंबर, 2018 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका के समर्थन में चुनिन्दा दस्तावेज की स्वीकार्यता पर केन्द्र की प्रारंभिक आपत्तियां अस्वीकार करने के शीर्ष अदालत के फैसले के बाद पीएम पर कोर्ट के हवाले से ‘चौकीदार चोर है' की टिप्पणी की थी. हालांकि बाद में उन्होंने अपनी इस टिप्पणी को अदालत के हवाले से कहने के लिये पीठ से बिना शर्त माफी मांग ली. कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी का माफीनामा स्वीकार करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को चेतावनी दी और कहा कि राजनीतिक बयानबाजी में कोर्ट को न घसीटें. एससी ने राहुल गांधी को भविष्य में और सतर्क रहने को भी कहा.  

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5. कर्नाटक के अयोग्य विधायकों के मामले में अहम फैसला 
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल कर्नाटक में अयोग्य ठहराए गए 17 बागी विधायकों के मामले में भी अहम फैसला सुनाया. एक तरफ, सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर द्वारा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सही ठहराया है. वहीं दूसरी तरफ, कोर्ट ने कहा कि सभी 17 बागी विधायक उपचुनाव में हिस्सा ले सकते हैं. कोर्ट ने 2023 तक अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को भी रद्द कर दिया. बता दें, इन विधायकों के बागी हो जाने के बाद जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन की सरकार गिर गई थी. और बाद में बीजेपी ने बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में राज्य में सरकार बनाई थी. इसी साल जुलाई में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने दल-बदल कानून के तहत इन 17 विधायकों को अयोग्य घोषित किया था.  

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