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वो 5 चीजें जो भारत को चीन से हर हाल में सीखने की जरूरत है

भारत को चीन से ऐसी कौन-कौन सी चीजें सीखने की जरूरत है, जिसका फायदा इस देश को मिले.

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वो 5 चीजें जो भारत को चीन से हर हाल में सीखने की जरूरत है

पीएम मोदी और चिनपिंग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

चीन का आज दुनिया में डंका बजता है, इसमें कोई दोराय नहीं हैं. चीन ने बीते कुछ दशकों में विकास के जो मानक स्थापित किये हैं, वह किसी भी देश के लिए अनुसरण करने योग्य है. चीन के विकास दर और राजनियक कुशलता ने आज उसे विकसित देशों की फेहरिस्त में अमेरिका के समांतर ला खड़ा कर दिया है. मगर वहीं भारत की बात की जाए तो यह अभी भी विकासशील देशों की लिस्ट में अटका पड़ा है. पीएम मोदी अभी चीन के दौरे पर हैं. इसलिए यह जानना खास हो जाता है कि भारत को चीन से ऐसी कौन-कौन सी चीजें सीखने की जरूरत है, जिसका फायदा इस देश को मिले. आखिर चीन किन मामलों में भारत से काफी आगे है, जिसमें हमें उसका अनुसरण करने की जरूरत है. तो चलिए जानते हैं वो पांच चीजें जिन्हें भारत को जरूर सीखनी चाहिए. 

प्रदूषण कंट्रोल नीति
प्रदूषण के मामले में चीन की राजधानी बीजिंग कभी दिल्ली से भी खतरनाक हुआ करती थी. प्रदूषण के मामले में एक वक्त था जब चीन की राजधानी बीजिंग का भी ऐसा ही हाल हो गया था, जैसा पिछले कुछ सालों से दिल्ली का हो रहा है, मगर बीजिंग ने मजबूत सिस्टम से वहां के प्रदूषण से निपटारा पाया. बीते कुछ सालों में जहां दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, वहीं बीजिंग में गिरावट दर्ज की गई है. बीते दो-तीन सालों में चीन ने टारगेट के तहत प्रदूषण कंट्रोल करने की योजना पर काम किया और बीजिंग को दिल्ली से बेहतर बना दिया.


विदेश नीति
मोदी सरकार के आने के बाद भले ही भारत की विदेश नीति की चहुंओर तारीफ हो रही हो, मगर ओवर ऑल देखा जाए तो विदेश नीती के मामले में भारत चीन से काफी पीछे रहा है. चीन अपने राजनयिक कौशल के लिए दुनिया भर में मशहूर है. दक्षिण एशिया के लगभग सभी देशों में जिस तरहसे उसने अपनी पैठ बनाई है, वह यह दिखाता है कि चीन किस तरह से अपनी नीतियों को बनाता है. बीते कुछ सालों में पड़ोसी मूल्क नेपाल के साथ भारत के बिगड़ते रिश्ते और चीन के बनते रिश्ते से इस चीज को आसानी से समझा जा सकता है. 

नीतियों का अनुशासित तरीके से कार्यान्वयन
भारत नीतियों-योजनाओं के निर्माण में काफी आगे है. मगर इसके इंप्लीमेंटेशन में काफी पीछे. यानी कि भारत में योजनाओं और नीतियों का जिस तरह से कार्यान्वयन किया जाता है, वह काफी दयनीय है. भारतीय सिस्टम में बहुत बड़ा गैप है, जिसकी वजह से योजनाएं तो बनती हैं, मगर उसे लागू करने का जो सिस्टम है, वह काफी खराह है. जिसकी वजह से उन योजनाओं का लाभ लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाता है. राष्ट्रीय नीतियों को लागू करवाने में बड़ा लूपहोल्स है, जिसकी वजह से हम पिछड़ जाते हैं. देखा जाए तो हमारे यहां योजनाएं पैसे बनाने के लिए बनाई जाती हैं, न कि देश के समग्र विकास के लिए. वहीं, चीन में राष्ट्रीय नीतियां देश के समग्र विकास को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. वे राजस्व में वृद्धि के साथ नीतियों की सफलता पर जोर देते हैं ताकि देश की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो सके. 

चीन का वैश्विक स्तर पर धाक
एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरने की तिथि में भारत और चीन में कोई बड़ा अंतर नहीं है. यहां तक की भारत की आजादी के दो साल बाद चीन एक स्वंयप्रभु राष्ट्र के रूप में सामने आया, जब 1949 में चीन की स्थापना हुई. बावजूद इसके आज चीन दुनिया में अमेरिका के मुकाबले सिरमौर बना है. इतने ही साल में जहां चीन विकास के सारे कीर्तिमान को स्थापित करते हुए वैश्विक स्तर पर अमेरिका को टक्कर दे रहा है और उससे आंख में आंख मिला कर बात कर रहा है, वहीं भारत अभी भी विकासशील देशों की कतार में ही खड़ा है. चीन में हर एक सेक्टर पर सरकार की जैसी नजर होती है, वैसी भारत में देखने को नहीं मिलती. यही वजह है कि चीन आज हर मामले में न सिर्फ भारत से आगे है, बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में भी शामिल है. 

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बाजार पर नियंत्रण
कहा जाता है कि आज के वक्त में जिस देश का बाजार पर नियंत्रण है, वह दुनिया भर में राज कर सकता है और चीन इस मामले में एक दम सटीक राह पर चल रहा है. चीन में लेबर से लेकर प्रोडक्ट तक काफी नियंत्रित है. वहां कच्चे माल से लेकर इंडस्ट्री तक में अच्छा खास नियंत्रण देखा जाता है. बाजार पर नियंत्रण को इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि कैसे चीनी सामान भारत में लोकप्रिय हो रहे हैं, और भारतीय उत्पादों से कम दाम पर चीनी सामाम मिल जाते हैं. मोबाइल हो या एसेसरीज, लाइट्स आइटम्स, खिलौने आदि में भी चीन काफी आगे हैं. यही वजह है कि भारतीय घरों में चीनी सामान बहुलता में पाये जाते हैं. 

VIDEO:पीएम पहुंचे चीन, शी. चिनफिंग के साथ होगी वार्ता



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