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'84 का सिख-विरोधी दंगा : कानपुर में हुई मौतों की जांच एसआईटी से कराने की मांग, सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

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'84 का सिख-विरोधी दंगा : कानपुर में हुई मौतों की जांच एसआईटी से कराने की मांग, सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: वर्ष 1984 में हुए सिख-विरोधी दंगों के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर में मारे गए 127 लोगों की मौत की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. याचिका पर सुनवाई 24 अप्रैल को की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को वर्ष 1984 की हिंसा को लेकर एसआईटी की निगरानी के लिए पैनल के गठन की मांग वाली याचिका के साथ जोड़ दिया है. इस याचिका में कहा गया है कि मामले में कुल 2,800 एफआईआर दर्ज की गई थीं, लेकिन किसी में भी आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया.

इसी साल 6 मार्च को सिख-विरोधी हिंसा की जांच के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एसआईटी जांच की निगरानी के लिए सुपरवाइज़री कमेटी के गठन की संभावना तलाशने के लिए कहा था, जो एसआईटी जांच और ट्रायल के केसों की निगरानी करे. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा था कि इन मामलों की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने की ज़रूरत है, जो मामलों की जांच और डे-टु-डे ट्रायल की निगरानी कर सके.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर कहा है, जिसमें एसआईटी की निगरानी करने और जांच व ट्रायल में तेजी लाने के आदेश देने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. केंद्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंसा से जुड़े 650 केस दर्ज किए गए थे, जिनमें से 293 केसों की एसआईटी ने छानबीन की थी.

रिकॉर्ड खंगालने के बाद इनमें से 239 केस एसआईटी ने बंद कर दिए हैं, जिनमें से 199 केस सीधे-सीधे बंद कर दिए गए. कुल 59 मामलों की दोबारा जांच शुरू की गई, जिनमें से चार मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि इनमें से भी दो मामलों को बंद किया जाएगा, क्योंकि आरोपियों की मौत हो चुकी है. शेष 38 मामलों को बंद कर दिया गया है. जिन 35 केसों की प्राथमिक जांच शुरू की गई थी, उनमें से 28 केसों की जांच पूरी की गई, लेकिन रिपोर्ट में यह जानकारी नहीं दी गई कि कितने केस बंद किए गए, और कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई.


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