संसद: भगोड़ों के ख़िलाफ़ लोक सभा में बिल हुआ पेश

बिल में विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति ज़ब्त करने की बात है. खास बात यह है कि यह बिल 100 करोड़ से ऊपर के आर्थिक अपराधियों के विदेश भागने और न लौटने पर कार्रवाई से जुड़ा है.

संसद: भगोड़ों के ख़िलाफ़ लोक सभा में बिल हुआ पेश

संसद की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

लोकसभा में भारी हंगामे के बीच वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने द फ्यूजिटिव इकानामिक आफिन्डर्स बिल (The Fugitive Economic Offenders Bill) पेश कर दिया. इस मौके पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी फ़रार हो गए, तब सरकार को इस बिल की याद आई. सदन में बिल के पेश होने के बाद कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने एनडीटीवी से कहा कि आज सवाल ये उठ रहा है कि सरकार ने इस बिल को पेश करने में इतनी देरी क्यों की. विजय माल्या कब भागे थे? ललित मोदी कब भागे थे? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े आर्थिक अपराधियों से निपटने के मामले में सिर्फ खानापूर्ति करने में लगी है.

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गौरतलब है कि बिल में विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे बड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति ज़ब्त करने की बात है. खास बात यह है कि यह बिल 100 करोड़ से ऊपर के आर्थिक अपराधियों के विदेश भागने और न लौटने पर कार्रवाई से जुड़ा है. सरकार का मानना है कि मोजूदा नियम-कानून इस तरह के आर्थिक अपराध के बड़े भगोड़ों से सख्ती से निपटने में नाकाफी साबित हुए हैं. इसलिए एक नया कानून लाना बेहद ज़रूरी है. बिल में दोषियों की संपत्ति की कूरकी और ज़ब्ती के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं. लेकिन इस मामले में तृणमूल श्वेत पत्र लाने की मांग कर रही है. उसका कहना है कि देश में कई नीरव मोदी हैं. तृणमूल के सांसद और नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने एनडीटीवी से कहा कि ललित मोदी, विजय माल्या, निरव मोदी और मेहुल चौकसी के विदेश भागने के बाद कुंभकर्ण नींद से जग रहा है.

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हम मांग करते हैं कि इस मसले पर सरकार श्वेत पत्र लेकर आए. सरकार बताए कि देश में कितने निरव मोदी हैं. विपक्ष का रुख़ देखकर लग रहा है कि इस बिल पर भी राजनीतिक आम राय बनाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.

 
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