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लोकनायक के गांव को बचाने के लिए चाहिए कोई 'नायक'

लोकनायक का गांव संकट में है. ऐसा कभी भी हो सकता है कि सरयू नदी के पानी का स्तर बढ़ जाए और कई घर जलमग्न हो जाए.

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लोकनायक के गांव को बचाने के लिए चाहिए कोई 'नायक'

सिताब दियारा में अनशकारियों के बीच बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी

नई दिल्ली: देश के लोगों को लोकतंत्र के सही मायने समझाने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण यानी कि जेपी के गांव सिताब दियारा में उनके जन्मदिन पर लोगों ने अनशन रखा. दरअसल अब लोकनायक का गांव संकट में है. ऐसा कभी भी हो सकता है कि सरयू नदी के पानी का स्तर बढ़ जाए और कई घर जलमग्न हो जाए. गांव बचाने को लेकर यहां के इतिहास में पहली बार युवकों ने एक दिन का अनशन किया. इनकी मांग है कि नदी के कटाव को रोकने का प्रयास किया जाए और हर हाल में बाढ़ की मार से गांव को बचाया जाए. जिन लोगों की जमीन और घर पानी में समा गए हैं उनको उचित मुआवजा दिया जाए. अभी हालत ये है कि सरयू नदी अपनी पुरानी जगह से हट गई है तथा नदी की धारा करीब तीन किलोमीटर गांव के पास पहुंच गई है. इससे गांव वालों को चिंता होना लाजिमी है, इसलिए जेपी की जयंती पर नदी के कटान का मुद्दा उभरकर सामने आया.

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दिल्ली में जेपी की 115वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मैं श्रद्धेय लोकनायक जयप्रकाश नारायण को उनकी जयंती पर नमन करता हूं. उनका साहस और उनकी सत्यनिष्ठा लोगों को प्रेरणा देती रहेगी. वहीं सिताब दियरा के लालाटोला में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने जेपी को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि वो प्रधानमंत्री से मिलकर सरयू नदी के कटान की चर्चा करेंगे. उन्होंने ये भरोसा जताया कि फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार सरकार तीन महीने तक इसे नियंत्रित करने की कोशिश करेंगी. वही छपरा के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि कटान पर रोक लगाने के लिए अगर केंद्र सरकार ने पहल नहीं की तो जेपी का ये पूरा गांव खत्म हो जाएगा.

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वहीं बलिया के सांसद भरत सिंह ने कहा कि वो ये मुद्दा ऊपर तक उठायेंगे और जेपी के गांव को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे. अनशन पर बैठे युवाओं के पास दिनभर नेताओं का तांता लगा रहा. सभी ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले तीन महीने के भीतर वो इसको लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे. इन युवाओं ने नेताओं को छह महीने का वक्त दिया है और साफ किया कि अगर छह महीने के भीतर स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे फिर आंदोलन करेंगे.
 
sitab diara

बता दें कि बेशक गांव के युवकों ने विरोध के लिए पहली बार ऐसा लोकतांत्रिक तरीका अपनाया है, लेकिन ये मुद्दा आज का नहीं है. बावजूद इसके कभी भी सरयू के कटान को रोकने का कोई स्थायी हल नहीं खोजा गया. इतना ही नहीं जेपी का ये ऐतिहासिक गांव आज भी कई मायने में उपेक्षित है.

VIDEO : जेपी की विरासत पर सियासत
किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत पानी में समा गए हैं. कईयों के घर पानी में डूब गए है पर किसी को उचित मुआवजा नहीं मिला. सैकड़ों परिवार बांध के किनारे अपनी जिदंगी काट रहे हैं. बड़े-बड़े किसान अब दाने-दाने के मोहताज हैं. नेता लोग जन्मदिन के दिन गांव जाकर वायदा तो कर आते हैं, लेकिन फिर सब कुछ देते हैं.


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