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सुप्रीम कोर्ट ने 20 हफ्ते बाद गर्भपात के लिए दिशा निर्देश पर केंद्र से मांगा जवाब

इस कानून में 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने पर रोक लगाई गई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 हफ्ते बाद गर्भपात के लिए दिशा निर्देश पर केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 20 हफ्ते बाद गर्भपात के लिए दिशा निर्देश पर केंद्र से मांगा जवाब (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कुछ विशेष मामलों में, गर्भवती महिला का 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने के लिए स्थायी तंत्र बनाने के वास्ते दिशा निर्देश बनाने पर सरकार से जवाब मांगा है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा परिषद को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर उनका जवाब मांग.

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बहरहाल, उच्चतम न्यायालय ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन से इनकार करते हुए कहा कि यह विधायी क्षेत्र का मामला है. इस कानून में 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने पर रोक लगाई गई है.

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शीर्ष न्यायालय कर्नाटक की अनुषा रविंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ता ने रेप पीड़िता और गर्भ में असामान्य भ्रूण रखने वाली महिलाओं के 20 सप्ताह से ज्यादा के भ्रूण को गिराने के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन की मांग की है.

 


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