मंगलुरु में CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में आरोपियों को जमानत मिली

आरोपियों को फरवरी में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों की रिहाई का आदेश दिया

मंगलुरु  में CAA के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में आरोपियों को जमानत मिली

मंगलुरु में सीएए के खिलाफ हुई हिंसा की फाइल फोटो.

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को सीएए (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 19 दिसंबर को मंगलुरु में हिंसा में लिप्त 21 आरोपियों को जमानत दे दी. हालांकि आरोपियों को पहले ही 17 फरवरी को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 मार्च को इस आदेश पर रोक लगा दी थी. COVID 19 के चलते व अन्य स्थिति बताते हुए दायर की गई अंतरिम जमानत की अर्जी पर मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने सभी आरोपियों की रिहाई का आदेश दिया.

हालांकि पीठ ने कहा कि वह कर्नाटक उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर कुछ नहीं कह रही है कि घटनास्थल पर आरोपी व्यक्तियों की उपस्थिति का निर्धारण करना संभव नहीं है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी प्रत्येक वैकल्पिक सोमवार को निकटतम पुलिस स्टेशन को रिपोर्ट करेंगे और वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वे किसी भी हिंसक गतिविधियों / बैठकों में भाग न लें.

आरोपी व्यक्तियों ने कहा था कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल थे, लेकिन पुलिस ने गोलीबारी का सहारा लिया जिससे दो व्यक्तियों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि वे 22 दिसंबर 2019 से सात महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे हैं. पुलिस ने कहा है कि उसने पहले ही चार्जशीट दायर कर दी थी और इसलिए उन्हें अब जांच की आवश्यकता नहीं है.

आरोपियों ने कहा कि 6 मार्च के आदेश के बाद पूरे देश और दुनिया में COVID -19 महामारी के घातक प्रसार के साथ तस्वीर बदल गई है. अनावश्यक रूप से हिरासत में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे जेलों की भीड़ बढ़ जाएगी और वायरस का प्रसार हो सकता है.


छह मार्च को कर्नाटक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी. CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मंगलौर के थाने में आग लगाने के मामले में 21 आरोपियों को जमानत देने वाले हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी. मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की तरफ से पेश हुए SG तुषार मेहता ने कहा था कि PFI के इन कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हमला भी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मोहम्मद आशिक सहित अन्य को नोटिस जारी किया था. 

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दरअसल आरोप है कि 19 दिसम्बर को मोहम्मद आशिक सहित 21 लोगों ने CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मंगलौर के थाने में आग लगा दी थी. इसके बाद सीसीटीवी के जरिए इन आरोपियों की पहचान कर इन्हें गिरफ्तार किया गया था. लेकिन हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में जमानत दे दी थी. इसके खिलाफ कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.