सीरम इंस्टीट्यूट का दावा, वैक्सीन सुरक्षित, वॉलंटियर के साथ हुई घटना वैक्सीन की वजह से नहीं हुई

चेन्नई के एक ट्रायल वॉलंटियर में 'वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन' सहित कई साइड इफेक्ट दिखने के बाद इस वैक्सीन पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके बाद कंपनी की ओर से यह बयान जारी किया गया है.

सीरम इंस्टीट्यूट का दावा, वैक्सीन सुरक्षित, वॉलंटियर के साथ हुई घटना वैक्सीन की वजह से नहीं हुई

ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के एक वॉलंटियर ने कंपनी पर लगाए थे आरोप. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया है कि ऑक्सफोर्ड कोरोनावायरस वैक्सीन (Oxford coronavirus vaccine) 'सुरक्षित और प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने वाली' है. चेन्नई के एक ट्रायल वॉलंटियर में 'वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन' सहित कई साइड इफेक्ट दिखने के बाद इस वैक्सीन पर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके बाद कंपनी की ओर से यह बयान जारी किया गया है.

अदार पूनावाला की कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि 'चेन्नई के वॉलंटियर के साथ हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन यह वैक्सीन की वजह से नहीं हुई है.' कंपनी ने वॉलंटियर के आरोपों को 'दुर्भावनापूर्ण और गलत' बताया है और कहा है कि वो उसपर 100 करोड़ मानहानि का मुकदमा करेगी.

वॉलंटियर के साथ हुई घटना को 'गंभीर प्रतिकूल प्रभाव' बताते हुए कहा कि 'सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया वॉलंटियर के मेडिकल कंडीशन के प्रति हमदर्दी रखता है, यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्णा है लेकिन यह वैक्सीन की वजह से नहीं हुई है और COVISHIELD वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित और प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने वाली है.'

कंपनी ने कहा है कि उसने सभी नियमों और नैतिक मानकों और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया था. इसने दावा किया है कि Data and Safety Monitoring Board and the Ethics Committee ने 'इसे स्वतंत्रत तरीके से हरी झंडी दी थी और इसे वैक्सीन ट्रायल से जुड़ा मुद्दा नहीं बताया था.'

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कंपनी ने कहा कि 'हम सबको इसका भरोसा दिलाना चाहते हैं कि यह वैक्सीन तब तक रिलीज नहीं की जाएगी, जब तक कि यह पूरी तरह सुरक्षित और इम्यूनोजेनिक न साबित हो जाती. वैक्सीनेशन और इम्यूनाइजेशन को लेकर पहले से मौजूद भ्रम और जटिलता को ध्यान में रखते हुए अनैतिक रूप से हमलों की शिकार कंपनी की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए हमने लीगल नोटिस भेजा है.'

बता दें कि चेन्नई के एक 40 साल के एक शख्स ने कोविड वैक्सीन के तीसरे चरण में हिस्सा लिया था और उसे 1 अक्टूबर को एक डोज़ दी गई थी. उसने 'वैक्सीन दिए जाने के बाद गंभीर प्रतिकूल लक्षण दिखाई देने' की शिकायत की थी और इसके लिए 5 करोड़ के मुआवजे की मांग की थी.

21 नवंबर को उसने अपने लीगल नोटिस में बताया है कि वैक्सीन लेने के 10 दिन बाद उसे 'तेज सिरदर्द', 'व्यवहार में पूरी तरह बदलाव' और 'रोशनी और आवाज से परेशानी' जैसी शिकायतें होने लगीं. नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि वो किसी को पहचान या फिर बोल नहीं पा रहा था.

26 अक्टूबर को 'Acute Encephalopathy' का इलाज करने के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया. नोटिस में इसे वैक्सीन के चलते पड़े प्रतिकूल प्रभाव का नतीजा बताया गया है.

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