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चुनाव आयोग का हलफनामा- गुजरात में राज्यसभा चुनाव कानून के मुताबिक, कमजोर पड़ रही कांग्रेस

अमित शाह और स्मृति ईरानी की रिक्त हुईं राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग चुनाव की घोषणा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

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चुनाव आयोग का हलफनामा- गुजरात में राज्यसभा चुनाव कानून के मुताबिक, कमजोर पड़ रही कांग्रेस

चुनाव आयोग ने गुजरात में स्मृति ईरानी और अमित शाह की रिक्त राज्यसभा सीटों पर चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है.

खास बातें

  1. आयोग ने कहा 57 सालों से कोर्टों के फैसलों के मुताबिक चुनाव होता रहा है
  2. कैजुएल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराया जाता रहा है
  3. दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के सत्यपाल मलिक मामले के फैसले का हवाला दिया
नई दिल्ली:

गुजरात में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की याचिका पर चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल किया है.चुनाव आयोग ने दो सीटों पर अलग- अलग चुनाव कराने के अपने फैसले को सही ठहराया. हलफनामे में कहा गया है कि अमित शाह और स्मृति ईरानी द्वारा खाली की गई सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना कानून के मुताबिक है.

चुनाव आयोग ने कहा है कि वह 57 सालों से दिल्ली हाईकोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों के मुताबिक ये चुनाव कराता आया है. चुनाव आयोग पहले से ही कैजुएल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराता आया है.जब किसी सदस्य की राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल खत्म होता है तो वह रेगुलर वेकेंसी होती है जिसके लिए एक साथ ही चुनाव कराया जाता है. चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के सत्यपाल मलिक मामले के फैसले का हवाला दिया है जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि कैजुअल वैकेंसी को अलग-अलग चुनाव से भरा जाएगा.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था. गुजरात कांग्रेस के नेता विपक्ष परेशभाई धनानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दो सीटों के लिए जारी चुनाव आयोग की अधिसूचना को चुनौती दी है.अमित शाह और स्मृति ईरानी द्वारा खाली की गई सीटों पर एक साथ चुनाव कराने की मांग की गई है.याचिका में कहा गया है कि एक ही दिन दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना असंवैधानिक और संविधान की भावना के खिलाफ है. गुजरात से राज्यसभा में खाली हुई दो सीटों पर पांच जुलाई को चुनाव होंगे.

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दरसअल चुनाव आयोग की अधिसूचना के मुताबिक अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाण-पत्र 23 मई को ही मिल गया था, जबकि स्मृति ईरानी को 24 मई को मिला. इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया. इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे. ऐसा होने से अब दोनों सीटों पर बीजेपी को जीत मिल जाएगी, क्योंकि वहां प्रथम वरीयता वोट नए सिरे से तय होंगे. एक साथ चुनाव होते तो कांग्रेस को एक सीट मिल जाती.

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संख्या बल के हिसाब से गुजरात में राज्यसभा का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 61 वोट चाहिए. एक ही बैलट पर चुनाव से उम्मीदवार एक ही वोट डाल पाएगा. इस स्थिति में कांग्रेस एक सीट आसानी से निकाल लेती क्योंकि उसके पास 71 विधायक हैं. लेकिन चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, विधायक अलग-अलग वोट करेंगे. ऐसे में उन्हें दो बार वोट करने का मौका मिलेगा. इस तरह बीजेपी के विधायक जिनकी संख्या 100 से ज्यादा है वे दो बार वोट करके दोनों उम्मीदवारों को जितवा सकते हैं.



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