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संघ के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के भाषण के बाद कांग्रेस नेताओं ने ली राहत की सांस, आनंद शर्मा के भी बदले सुर

आनंद शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि संघ मुख्यालय में ‘वरिष्ठ नेता और विचारक’ की तस्वीरें देखकर कांग्रेस पार्टी के लाखों कायकर्ताओं और भारतीय गणराज्य के बहुलवाद, विविधता एवं बुनियादी मूल्यों में विश्वास करने वालों को दुख हुआ है.

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संघ के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी के भाषण के बाद कांग्रेस नेताओं ने ली राहत की सांस, आनंद शर्मा के भी बदले सुर

आनंद शर्मा (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कांग्रेस नेता ने भाषण से पहले ट्वीट कर नाराजगी जाहिर की थी.
  2. भाषण के बाद बोले कि कांग्रेस को किसी तरह की शंका नहीं थी.
  3. प्रणब मुखर्जी के भाषण के बाद कांग्रेस नेताओं ने ली राहत की सांस.
नई दिल्ली:

बुधवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुख्यालय में टीवी चैनलों पर जैसे ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी लाइव दिखें, उसके तुरंत बाद कांग्रेस के सीनियर नेता आनंद शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि संघ मुख्यालय में ‘वरिष्ठ नेता और विचारक’ की तस्वीरें देखकर कांग्रेस पार्टी के लाखों कायकर्ताओं और भारतीय गणराज्य के बहुलवाद, विविधता एवं बुनियादी मूल्यों में विश्वास करने वालों को दुख हुआ है. बता दें कि प्रणब मुखर्जी के भाषण से पहले कांग्रेस नेता काफी अस्मंजस में थे कि संघ के कार्यक्रम में आखिर वह क्या बोलेंगे, मगर भाषण के बाद कांग्रेस नेता राहत की सांस लेते नजर आए. 

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आनंद शर्मा ने भाषण से पहले ट्वीट कर कहा कि ‘वरिष्ठ नेता और विचारक प्रणब मुखर्जी की आरएसएस मुख्यालय में तस्वीरों से कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ता और भारतीय गणराज्य के बहुलवाद, विविधता एवं बुनियादी मूल्यों में विश्वास करने वाले लोग दुखी हैं.’ उन्होंने कहा, ‘संवाद उन्हीं लोगों के साथ हो सकता है जो सुनने, आत्मसात करने और बदलने के इच्छुक हों. यहां ऐसा कुछ नहीं जिससे पता चलता हो कि आरएसएस अपने मुख्य एजेंडा से हट चुका है. संघ वैधता हासिल करने की कोशिश में है.’ बता दें कि आनंद शर्मा का यह बयान प्रणब मुखर्जी के भाषण से पहले का था. 


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आरएसएस मुख्यालय में अपने भाषण के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने धर्मनिरपेक्षतावाद और अहिंसावाद पर जोर दिया और कहा कि भारत की आत्मा अनेकता और सहिष्णुता में बसती है. उन्होंने साफतौर पर कहा कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान क्षीण पड़ जाएगी. हमारे समाज की यह बहुलता सदियों से पैदा हुए विचारों से घुलमिल बनी है. पंथनिरपेक्षता और समावेशन हमारे लिए विश्वास का विषय है. यह हमारी मिश्रित संस्कृति है जिससे हमारा एक राष्ट्र बना है.'

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प्रणब मुखर्जी के संबोधन के बाद आनंद शर्मा ने एनडीटीवी से कहा कि कांग्रेस में किसी भी व्यक्ति को प्रणब मुखर्जी की स्पष्टता, साहस, दृढ़ विश्वास और भारत के विचार के प्रति उनकी वचनबद्धता" के बारे में कोई संदेह नहीं था. साथ ही उन्होंने कहा कि यह आरएसएस के लिए प्रणब मुखर्जी का संदेश था, जिसे आत्मसात करना चाहिए. 

उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने जो संदेश दिया है उसके मुताहिक भारत समावेशी और सहिष्णु, शांतिपूर्ण, बहु-धार्मिक, बहुभाषी और बहु-सांस्कृतिक है. क्या आरएसएस इसे आत्मसात करने को तैयार है, जो मैंने सवाल उठाए थे और जो मेरे दिमाग में अब भी है. बता दें कि संघ के कार्यक्रम में जाने के आमंत्रण को स्वीकारने के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सवाल उठाया था और उनकी आलोचना भी की थी. 

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हालांकि, आनंद शर्मा ने हा कि कांग्रेस ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी थी. किसी ने पार्टी की ओर से न ही आवाज उठाई और न ही किसी ने उनकी आलोचना की. उन्होंने कहा कि हमारे पार्टी के कई लोग अभी भी आश्चर्य़ में थे कि संघ के कार्यक्रम में जहां पूर्व राष्ट्रपति मौजूद थे, वहां न ही राष्ट्रीय ध्वज फहराए गये और न ही राष्ट्रगान बजा. 

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