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ब्रह्मोस मिसाइल के बाद भारत की वो विनाशकारी मिसाइलें जिनका दुनिया मानती है लोहा

मंगलवार को भारत द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह तय हो गया कि भारत के सितारे बुलंद हैं. सुखोई से ब्रह्मोस को दागने के बाद पड़ोसी मुल्कों में खलबली मच गई है.

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ब्रह्मोस मिसाइल के बाद भारत की वो विनाशकारी मिसाइलें जिनका दुनिया मानती है लोहा

(फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

मंगलवार को भारत द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह तय हो गया कि भारत के सितारे बुलंद हैं. सुखोई से ब्रह्मोस को दागने के बाद पड़ोसी मुल्कों में खलबली मच गई है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताएंगे भारत की उन अन्य शक्तिशाली मिसाइलों के बारे में जिनका लोहा न केवल पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान बल्कि संपूर्ण विश्व मानता है. 

अग्नि-I : इस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 25 जनवरी 2002 को किया गया था. इस मिसाइल का वजन 12 टन है और इसकी लंबाई 15 मीटर है. इसकी मारक क्षमता 700-1200 किलोमीटर है.  अग्नि-१ में विशेष नौवहन प्रणाली लगी है जो सुनिश्चत करती है कि मिसाइल अत्यंत सटीक निशाने के साथ अपने लक्ष्य पर पहुंचे. इस मिसाइल के संचालन अधिकार स्ट्रेटजिक फोर्स कमांड के पास है.

अग्नि-II : 11 अप्रैल 1999 में इसका पहला परीक्षण किया गया. इस मिसाइल का वजन 16,000 किलो है और इसकी मारक क्षमता 2000-3500 किलोमीटर है.  इस मिसाइल के सफल परीक्षण ने चीन और पाकिस्तान की नींदें उड़ा दी थीं. क्योंकि इसकी मारक क्षमता में दोनों देशों के कई बड़े शहर आते हैं.


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अग्नि-III : जुलाई 2006 में इसका पहला परीक्षण किया गया. इस मिसाइल का वजन 48,000 किग्रा है और इसकी लंबाई 17 मीटर.  इस मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है. यह अपने तरह का विश्व के सबसे घातक हथियारों में से एक है. यह मिसाइल न्यूक्लीयर क्षमता से भी संपन्न है.

अग्नि-IV : 15 नवंबर 2011 को इस मिसाइल का पहला परीक्षण किया गया. इसका वजन 17,000-किलोग्राम है और इसकी लंबाई 20 मीटर. इस मिसाइल का निर्माण अग्नि-II और अग्नि-III के बीच की कड़ी को पूरा करने के लिए किया गया था.

अग्नि-V : 19 अप्रैल 2012 को इस शक्तिशाली मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया गया. इसका वजन 50,000 किलो है और इसकी लंबाई 17.5 मीटर है. 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-5 भारत की पहली इंटर-कॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल है.

शौर्य मिसाइल : यह सतह से सतह पर मार करने वाला सामरिक प्रक्षेपास्त्र है. 2008 में इसका पहला सफल परीक्षण किया गया. शौर्य मिसाइल का वजन 42 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 1.90 मीटर. इस मिसाइल की मारक क्षमता है 750 से 1900 किलोमीटर है. यह भारत का पहला हाइपर सुपर सॉनिक मिसाइल भी है.

पृथ्वी : भारत के मिसाइल प्रोग्राम के अंतर्गत निर्माण किया जाने वाला पहला मिसाइल था पृथ्वी. परमाणु संपन्न तथा 150-350 किमी की रेंज तक सतह से सतह पर मार करने वाला यह मिसाइल सेना के तीनों अंगों का अभिन्न हिस्सा है.

नाग मिसाइल : 1990 में इस मिसाइल का वजन 42 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 1.90 मीटर. इसे टैंक भेदी मिसाइल भी कहा जाता है. ‘पृथ्वी ’ एवं ‘अग्नि ’ जैसे स्वदेशी मिसाइलों की श्रृंखला में ‘नाग’ पांचवा प्रक्षेपास्त्र है. यह मिसाइल अपनी विशेषताओं में 'टॉपअटेक- फायर एण्ड फोरगेट' तथा सभी मौसम में फायर करने की खास क्षमता रखती है.

धनुष : धनुष मिसाइल स्वदेशी तकनीक से निर्मित पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का नौसैनिक संस्करण है.  यह प्रक्षेपास्त परमाणु हथियारों को ले जाने की क्षमता रखता है. प्रक्षेपण के समय इसका वजन 4600 किलोग्राम होता है.

ब्रह्मोस मिसाइल : इसका विकास रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroeyenia) तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)ने संयुक्त रूप से इसका किया है. यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की टैकनोलजी पर आधारित मिसाइल है. 2001 में इसका सफल परीक्षण किया गया. ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 3000 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 8.4 मीटर है. ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है. इसकी रफ्तार अमेरिका के सबसोनिक तोमाहावक क्रूज मिसाइल से तीन गुनी अधिक है.

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आकाश मिसाइल : इसका परीक्षण 1990 में किया गया था. इसका वजन 720 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 5.78 मीटर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश की तुलना अमेरिका के पेट्रियोट मिसाइल सिस्टम से की जाती है. एक समय में यह मिसाइल 8 भिन्न लक्ष्य पर निशाना साध सकती है.

गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रम्होस का सुखोई लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण कर बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत तैयार इस मिसाइल के जल और थल में पहले ही परीक्षण हो चुके हैं.



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