खेतों के बाद अब उड़ानों के लिए भी खतरा बना टिड्डी दल, पायलटों के लिए एडवाइजरी जारी 

अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से 1 लाख 25 हजार एकड़ खेतों को नुकसान पहुंचा है. 4 करोड़ टिड्डियों का दल 35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है. 

खेतों के बाद अब उड़ानों के लिए भी खतरा बना टिड्डी दल, पायलटों के लिए एडवाइजरी जारी 

नई दिल्ली:

पिछले कई दिनों से देश के कई राज्यों में जारी टिड्डी दल के हमले (Locust Attack) ने अब खेतों के अलावा अब विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने शुक्रवार को लगभग तीन
दशकों में पश्चिमी और मध्य भारत में आए टिड्डियों के सबसे खराब आक्रमण के बीच चेतावनी जारी की. डीजीसीए ने सभी एयरलाइंस के लिए जारी किए अपने सर्कुलर में कहा है, 'आम तौर पर टिड्डी दल निचले स्तरों पर पाए जाते हैं और इसलिए यह विमान के सबसे अहम फेस लैंडिग और टेकऑफ में खतरा पैदा करते हैं.'

नोट में कहा गया है, "विमान के लगभग सभी एयर इनटेक पोर्ट्स में बड़ी संख्या में अंतर्ग्रहण होने का खतरा होगा, अगर विमान एक झुंड (इंजन इनलेट, एयर कंडीशनिंग पैक इनलेट आदि) के माध्यम से उड़ता है," ये टिड्डियां उड़ान के दौरान सेंसर और इंस्ट्रूमेंट्स भी टकरा सकते हैं, जिससे गलत रीडिंग, विशेष रूप से अविश्वसनीय एयरस्पीड और अल्टीमीटर इंडिकेशन का संकेत मिलता है.


डीजीसीए ने कहा, 'हालांकि एक एक टिड्डी आकार में छोटी होती है लेकिन विंडशील्ड पर बड़ी संख्या में टिड्डियों का हमला
पायलट फॉरवर्ड विजन को प्रभावित करने के लिए काफी है. यह फ्लाइन के लैंडिंग, टैक्सी और टेक ऑफ चरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है. कई बार वाइपर के इस्तेमाल से धब्बा और भी फैल सकता है, पायलट को विंड शील्ड से टिड्डे को हटाने के लिए वाइपर का उपयोग करने से पहले इस पहलू पर विचार करना चाहिए,"

टिड्डियों के बड़े झुंड एक जमीन के बड़े हिस्से में देखने में बाधा डाल सकते हैं. एजेंसी ने कहा, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स से
पायलटों को यह बताने के लिए कहा जाए कि क्या टिड्डियों के झुंडों को देखा गया है?"जहां तक संभव हो, यह सख्त निर्देश दिए जाते है कि टिड्डियों के किसी तरह के झुंड के दिखने पर उड़ान टाल देनी चाहिए. एकमात्र अनुकूल पहलू यह है कि टिड्डे रात में नहीं उड़ते हैं, इस प्रकार यह देखने और बचने का बेहतर अवसर प्रदान करता है,"

एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय
टिडि्डयों का जीवन सामान्यतया 3 से 6 माह का होता है. नमी वाले इलाकों में ये एक बार में 20 से 200 तक अंडे देती हैं, जो 10 से 20 दिन में फूटते हैं. शिशु टिड्डी का पेड़-पौधे खाती है, 5-6 हफ्ते में बड़ी हो जाती है. इन्हें मारने का सबसे अच्छा उपाय अंडों के फूटते ही उन पर रसायन का छिड़काव है. टिड्डी अपने वजन से कहीं अधिक भोजन एक दिन में खाती है. ये एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है. 

1 लाख 25 हजार एकड़ खेतों को नुकसान
अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से 1 लाख 25 हजार एकड़ खेतों को नुकसान पहुंचा है. 4 करोड़ टिड्डियों का दल 35 हजार लोगों के हिस्सा का अनाज खा सकता है. 

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उत्तर भारत में टिड्डी दल का आतंक