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हेपेटाइटिस बी की ओरल ड्रग की खोज का दावा किया एम्स ने

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हेपेटाइटिस बी की ओरल ड्रग की खोज का दावा किया एम्स ने
नई दिल्‍ली:

भारत के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान एम्स ने दावा किया है कि उसके मेडिकल साइंसदानों ने जानलेवा हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिये एक ओरल वैक्सीन की खोज कर ली है। पिछले कुछ सालों से हेपेटाइटिस बी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अभी इस बीमारी की दवा केवल इंजेक्शन के रूप में ही उपलब्ध है। ऐसे में एम्स के डॉक्टरों की एक रिसर्च और उनका दावा उम्मीद जगाने वाला है।

एम्स का कहना है कि तीन साल की रिसर्च के बाद ये कामयाबी मिली है और चूहों पर उसका सफल प्रयोग हो चुका है।

रिसर्च टीम के प्रमुख अमित कुमार डिंडा ने एनडीटीवी इंडिया को बताया कि हेपेटाइटिस बी के प्रोटीन एंटिजन को कई नैनो पार्टिकल में लोड किया और फिर चूहों को मुंह से दिया गया। परीक्षण बताते हैं कि चूहों में इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और करीब दो महीने तक रहती है। डॉ. डिंडा का कहना है कि इस परीक्षण के हिसाब से इंसानों में दस साल या उससे अधिक वक्त तक इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता रहेगी।

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अभी मरीज को हेपेटाइटिस बी की जिसकी तीन डोज़ दी जाती हैं... लेकिन डॉक्टरों का दावा है कि नई खोज के कई फायदे हैं। इसकी एक ही डोज़ ही काफी होगी। ओरल वैक्सीन से मरीज़ को दर्द से छुटकारा मिलेगा। सुई से होने वाले संक्रमण का खतरा नहीं होगा और ये दवा इंजेक्शन के मुकाबले अधिक तेज़ी से शरीर में फैलती है। इससे ग्रामीण इलाकों में पोलियो इम्युनाइजेशन जैसे बड़े प्रोग्राम आसानी से चलाये जा सकेंगे जहां लोग अभी इंजेक्शन नहीं लगवाना चाहते। ये दवा मौजूदा वैक्सीन से काफी सस्ती भी होगी।


एम्स के डॉक्टर दावा कहते हैं कि गिनी पिग पर भी परीक्षण हो चुके हैं और टेस्ट के नतीजे अगले दो महीने में आ जाएंगे हालांकि दवा के बाज़ार में आने में तीन से पांच साल लग सकते हैं।



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