यह ख़बर 01 अगस्त, 2013 को प्रकाशित हुई थी

दुर्गा शक्ति पर कार्रवाई सही, निलंबन का खनन से लेना-देना नहीं : अखिलेश

खास बातें

  • डीएम की रिपोर्ट में बताया गया है कि एसडीएम दुर्गा शक्ति ने किसी मस्जिद की दीवार नहीं गिरवाई बल्कि उनके साथ बातचीत के बाद सहमत गांववालों ने ही दीवार गिरा दी।
लखनऊ:

नोएडा की एसडीएम दुर्गा शक्ति के निलंबन पर आलोचना झेल रही यूपी सरकार के बचाव में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि दुर्गा शक्ति पर कार्रवाई सही है। इस निलंबन का खनन से लेना-देना नहीं है। अखिलेश ने यह भी कहा कि बदले में कोई कार्रवाई नहीं की, दरअसल माहौल बिगाड़ने को लेकर यह कार्रवाई की गई है।

वहीं सपा नेता नरेश अग्रवाल ने यहां तक कह डाला की यूपी को दुर्गा शक्ति जैसी अधिकारियों की जरूरत नहीं है और केंद्र सरकार उन्हें वापस क्यों नहीं बुला लेती।

एनडीटीवी से बातचीत में अग्रवाल यहीं पर नहीं रुके बल्कि उन्होंने नोएडा के उस डीएम के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कह डाली, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में दुर्गा शक्ति को क्लीन चिट दी है। उन्होंने डीएम की रिपोर्ट को पूरी तरह गलत करार दिया।

नरेश अग्रवाल ने आईएएस अधिकारियों की ट्रेनिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुर्गा शक्ति जैसे अधिकारी राज्य सरकार की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा देते हैं। उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

उधर, नागपाल के निलंबन का मामला जोर पकड़ता जा रहा है। इस निलंबन से नाराज केंद्रीय आईएएएस एसोसिएशन कार्मिक मामलों के मंत्री नारायणसामी से मिलने पहुंचा है। आईएएस संघ निलंबन वापस लेने की मांग कर रहा है। इस बीच सूत्र बता रहे हैं कि डीएम की रिपोर्ट ने भी यूपी सरकार को कठघरे में ला खड़ा किया है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एसडीएम दुर्गा शक्ति ने किसी मस्जिद की दीवार नहीं गिरवाई बल्कि उनके साथ बातचीत के बाद सहमत गांववालों ने ही दीवार गिरा दी यानी दुर्गा शक्ति के निलंबन का आधार ही गलत साबित होता दिख रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस घटना के बाद इलाके में किसी तरह का धार्मिक तनाव नहीं था। ऐसे में अखिलेश सरकार का फैसला सवालों के घेरे में आ गया है।

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चर्चा है कि दुर्गा शक्ति नागपाल रेत माफियाओं और समाजवादी पार्टी के एक नेता के निशाने पर थीं। दरअसल, दुर्गा शक्ति नागपाल ने रेत माफियाओं के अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिए कई कड़े कदम उठाए थे, जिससे समाजवादी पार्टी के एक नेता काफी खफा थे और उन्होंने ही अतिक्रमण विवाद को हवा देकर दुर्गा शक्ति के निलंबन में अहम भूमिका अदा की।

इसके अलावा उनके निलंबन के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर भी आज सुनवाई होनी है।