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JNU छात्रसंघ चुनाव में एक बार फिर लहराया वाम दलों का परचम, जीती सभी चार सीटें

मंगलवार देर शाम तक चली मतगणना के बाद स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की आइशी घोष अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुईं.

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JNU छात्रसंघ चुनाव में एक बार फिर लहराया वाम दलों का परचम, जीती सभी चार सीटें

जेएनयू में लेफ्ट पार्टी ने जीता चुनाव

खास बातें

  1. मंगलवार शाम को आया चुनाव परिणाम
  2. सभी चार सीटों पर वाम दलों ने किया कब्जा
  3. हाईकोर्ट ने लगाई थी चुनाव परिणाम जारी करने पर रोक
नई दिल्ली:

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के चुनाव में एक बार फिर वाम दलों ने बाजी मारी है. मंगलवार को जारी परिणाम में सभी चार पदों पर वामपंथी दलों के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के विश्वविद्यालय ने देर शाम परिणाम घोषित किए. देर शाम तक चली मतगणना के बाद स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की आइशी घोष अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुईं. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के मनीष जांगिड़ को 1,175 वोटों के अंतर से पराजित किया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

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चुनाव समिति की तरफ से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि छात्र संगठनों -आइसा, एसएफआई, एआईएसएफ, डीएसएफ- की लेफ्ट यूनिटी ने सभी चार पदों -अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पर जीत दर्ज की है. आइसा के सतीश चंद्र यादव महासचिव पद पर 2,518 मतों से विजयी हुए हैं. डीएसएफ के साकेत मून उपाध्यक्ष पद पर विजयी हुए हैं, और उन्हें 3,365 वोट मिले, जबकि एआईएसएफ के मोहम्मद दानिश 3295 वोट पाकर संयुक्त सचिव के पद पर विजयी हुए.

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गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू चुनाव समिति को अनुमति दी कि छह सितंबर को हुए छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए जाएं, और उसके बाद ही परिणाम घोषित किए गए. अदालत ने जेएनयू को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप चुनाव परिणाम को अधिसूचित करने की भी अनुमति दी. इससे पहले जेएनयूएसयू के परिणाम घोषित करने पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी, क्योंकि जेएनयू के विद्यार्थियों अंशुमान दुबे और अमित कुमार द्विवेदी ने याचिकाएं दायर की थीं.

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एक याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि विश्वविद्यालय की चुनाव समिति ने काउंसिलर सीटों की संख्या 55 से घटाकर 46 कर दी. याचिकाकर्ता ने कहा था कि यह लिंगदोह समिति की सिफारिशों के खिलाफ है, जो प्रत्येक स्कूल या विभाग को छात्रसंघ में अपना प्रतिनिधि भेजने की स्वीकृति देती है.



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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