विभिन्न मांगों को लेकर ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन ने जंतर-मंतर पर दिया धरना

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन (AIBOC) के चेयरमैन सुनील कुमार के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली के  जंतर-मंतर में महाधरना का आयोजन किया गया.

विभिन्न मांगों को लेकर ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन ने जंतर-मंतर पर दिया धरना

इस धरने में 15000 से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया

नई दिल्ली:

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन (AIBOC) के चेयरमैन सुनील कुमार के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली के  जंतर-मंतर में महाधरना का आयोजन किया गया. ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन जो कि बैंक अधिकारियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली भारत की सबसे बड़ी संस्था है और इनके 320000 से ज्यादा सदस्य है. इन्होंने 4 फरवरी को जंतर मंतर पर बैंकिंग इंडस्ट्री के विभिन्न समस्याओं के लिए एक महामोर्चा के आयोजन किया है. इस महामोर्चा में केंद्र सरकार के अनेको संगठनों ने ऑल इंडिया पब्लिक सेक्टर और सेंट्रल गवर्नमेंट ऑफिसर कन्फेडरेशन के बैनर तले भाग लिया.  महामोर्चा की शुरुआत मॉडर्न स्कूल बराखम्बा रोड, दिल्ली से एक विशाल जत्थे के रूप में हुई, जो कि संसद मार्ग से होते हुए जंतर मंतर पर महामोर्चा के शक्ल में तब्दील हुई.

यह विशाल रैली 12:30 बजे से शुरू हुई और शाम के 4 बजे तक चली. इस रैली में 15000 से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया और इसे ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन (AIBOC) के शीर्ष नेतृतव,संसद के माननीय सदस्य, हमारे भ्रातृ संगठन के नेताओं और सिविल सोसाइटी के सदस्यों द्वारा संबोधित किया गया. AIBOC इतने सारे संगठन के समर्थन, जिसमें कि ट्रेड यूनियन, कामगार समूह, स्वमसहयता समूह और अनकों दूसरे संगठन शामिल हैं से अभिभूत हुआ. 

 

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इस महामोर्चे का मुख्य उद्देश्य था...


1.विजया बैंक, देना बैंक और बैंक ऑफ बड़ोदा के विलय का विरोध

2.RRB के विलय का विरोध

3.New pension scheme को खत्म करना एवं डेफिनिट पेंशन स्कीम को दोबारा लाना

4.पेंशन सुधार एवं फैमिली पेंशन में रिवीजन की मांग
 
5.कैथोलिक सीरियन बैंक द्वारा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से 58 साल करने का विरोध

6.बैंकरों पर हो रहे लगातार हमलों का विरोध

7.विलफुल डिफॉल्टर की लिस्ट पब्लिश करने की मांग
 
8.अधिकारी और वर्कमैन डायरेक्टर के तुरंत बहाली की मांग 

9.AIBOC इंडियन बैंक एसोसिएशन द्वारा जो कदम उठाए जा रहे है द्विपक्षीय वेज रिवीजन के संबंध में जो कि बैंक अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के हितों के पूर्णत विरोधी है उसकी कड़ी निंदा करती है. 

10 सरकार द्वारा जल्दबाजी में देना बैंक, विजय बैंक और बैंक ऑफ बड़ोदा के विलय का निर्णय का हम कड़ा विरोध करते हैं.

 
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