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एमरजेंसी सेवाओं को लेकर हर पार्टी फिक्रमंद, सड़कों पर जीतेगी ज़िन्दगी

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एमरजेंसी सेवाओं को लेकर हर पार्टी फिक्रमंद, सड़कों पर जीतेगी ज़िन्दगी
नई दिल्ली: कभी बिजली-पानी पर हाहाकार, कभी महंगाई की मार... कहीं साफ-सफाई की दरकार, कहीं सड़क बनने का इंतज़ार... दिल्ली विधानसभा चुनाव में आमतौर पर यही बुनियादी मुद्दे भारी पड़ते रहे हैं। सड़क पर रेंगते ट्रैफिक या फिर उसमें फंसी एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की बारी अब तक नहीं आई है, लेकिन इस बार दिल्ली जीतने के इरादे से विधानसभा चुनावों में उतरी बीजेपी एनडीटीवी की मुहिम 'राइट लेन बने लाइफ लेन' को चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने जा रही है, ताकि एमरजेंसी सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।

बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि अगर हम सत्ता में आते हैं तो जहां-जहां मुमकिन है, एक लेन बनवाई जाएगी। साथ ही एमरजेंसी सेवाओं - जैसे, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड - की गाड़ियों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे, ताकि जो लोग इनकी राह में अड़चन पैदा करें, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही बीजेपी के मेनिफेस्टो में भी इस मुद्दे को शामिल किया जाएगा।

यह मुहिम जरूरतमंदों की जिंदगी से जुड़ी है, लिहाजा पिछली बार सत्ता में आ चुकी आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे की तारीफ करते हुए साथ देने का वादा किया है। आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसौदिया ने कहा कि हम इमरजेंसी सर्विसेज को लेकर गंभीर हैं। सत्ता में आए तो कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द लोगों को समय पर एम्बुलेंस मिल पाए। यही नहीं, फायर की गाड़ियों और पीसीआर के रास्ते में भी कोई बाधा न आए, इस पर हम काम कर रहे हैं और योजना भी बनाई जा रही है कि इनकी राह सड़कों पर आसान हो सके।

दूसरी तरफ, लगातार 15 साल सत्ता में रह चुकी कांग्रेस ने शायद ही कभी इमरजेंसी सर्विस को लेकर अर्जेंसी दिखाई, लेकिन अब जब सत्ता से दूर है, तब गंभीर है। कांग्रेस नेता हारुन यूसुफ ने भी भरोसा दिया कि सत्ता में आए तो यह बात हमारे जहन में है। हम इसमें ठोस कदम उठाएंगे, ताकि इमरजेंसी सर्विसेज को जाम से न जूझना पड़े।

इतना ही नहीं, अगर आने वाले वक्त में कोई कानून बना तो केंद्र का भी पूरा सपोर्ट मिलेगा। ट्रांसपोर्ट मंत्री ने भी इसे हरी झंडी दिखा दी है। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एनडीटीवी ने जब इस मसले को नितिन गडकरी के सामने उठाया तो उन्होंने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट में इसको लेकर बदलाव करेंगे।

हर पार्टी फिक्रमंद, हर किसी का समर्थन, हर कोई गंभीर... दावे भी हैं, वादे भी... लिहाजा चुनाव में जीत किसी की हो और कोई भी हारे, लेकिन अगर वादे पर कायम रहे तो इतना तो मानकर चलिए कि सड़कों पर जिंदगी जरूर जीतेगी।


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