इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी का निर्वाचन बरकरार रखा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी का निर्वाचन बरकरार रखा

पीएम नरेंद्र मोदी का फाइल फोटो...

खास बातें

  • कोर्ट ने कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वी द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी.
  • न्‍यायालय ने याचिकाकर्ता अजय राय को आड़े हाथ लिया.
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की आपत्तियों को खारिज किया.
इलाहाबाद:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को कायम रखते हुए इसे चुनौती देने वाली कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वी की एक याचिका खारिज कर दी.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आदेश सुनाते हुए ऐसी चुनाव याचिका के साथ अदालत से गुहार लगाने पर कांग्रेसी विधायक और 2014 लोकसभा चुनावों में वाराणसी से पार्टी के उम्मीदवार याचिकाकर्ता अजय राय को आड़े हाथ लिया, जिसमें ऐसे आरोप लगाए गए जो अस्पष्ट एवं बिना मजबूत तथ्यों के समर्थन के बयान वाले थे.

अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और विधि आयोग के सदस्य सत्यपाल जैन के नेतृत्व में मोदी का प्रतिनिधित्व करने वाली वकीलों की टीम की प्रारंभिक आपत्तियों को स्वीकार किया.

सोमवार को खुली अदालत में आदेश लिखवाना शुरू करने वाली अदालत ने नामांकन पत्र में पत्नी जशोदाबेन की संपत्ति और दायित्वों के संबंध में कालम के सामने मोदी द्वारा 'नहीं पता' लिखने पर याचिकाकर्ता की आपत्ति को खारिज किया.

अदालत ने कहा, 'यह आरोप लगाते हुए कि 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया गया, याचिकाकर्ता यह निर्दिष्ट करने में असफल रहे कि ये भुगतान किसने किए, किसे किए और भुगतान का तरीका क्या था. इसमें स्पष्ट बातें नहीं बताई गई हैं और आरोप मीडिया की खबरों पर आधारित 'अस्पष्ट और बगैर स्पष्टीकरण वाले हैं'. राय पिछले लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी. उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मोदी के चुनाव प्रचार में '50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च' किया गया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि प्राचीन मंदिर वाले इस नगर में कई आलीशान होटलों को '24 अप्रैल, 2014 से 12 मई 2014 की अवधि के दौरान' बुक किया गया था.

राय ने यह भी दावा किया था कि प्रचार करने तथा 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' और 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसे नारों को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से '400 से अधिक वैन' लगाई गई थीं.

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यद्यपि अदालत ने जैन की दलील से सहमति जताई कि 'याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कोई भी सामग्री पेश करने में असफल रहे कि ये खर्चे सीधे उम्मीदवार द्वारा अथवा उनके निर्देश पर उनके समर्थकों द्वारा किये गए'.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)