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Alok Verma Case : केंद्र ने SC में कहा- आलोक वर्मा अभी भी चीफ, गाड़ी-बंगला वही है, हमने सिर्फ छुट्टी पर भेजा

सीबीआई बनाम सीबीआई मामले (CBI vs CBI) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गुरुवार को सुनवाई शुरू हुई. पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों ने दलील दी थी, मगर सुप्रीम कोर्ट से ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को लेकर कोई फैसला नहीं दिया था.

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Alok Verma Case : केंद्र ने SC में कहा- आलोक वर्मा अभी भी चीफ, गाड़ी-बंगला वही है, हमने सिर्फ छुट्टी पर भेजा

Alok Verma Case in Supreme Court: आलोक वर्मा की फाइल फोटो

नई दिल्ली: सीबीआई बनाम सीबीआई मामले (CBI vs CBI) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक बार फिर से बुधवार को सुनवाई की. कोर्ट में एजी केके वेणुगोपाल ने अफसरों को अवकाश पर भेजे जाने के पीछे दलील दी कि दोनों अफसर बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे. ऐसा सख्त कदम उठाना हमारी विवशता थी. उस समय डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के कई फैसले और कदम ऐसे थे जो देश की सबसे बड़ी और ऊंची जांच एजेंसी की छवि को धूमिल कर सकते थे.

पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों ने दलील दी थी, मगर सुप्रीम कोर्ट से ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को लेकर कोई फैसला नहीं दिया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा वापस ड्यूटी पर लौटेंगे या आगे उन्हें जांच का सामना करना होगा. आलोक वर्मा ने उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी है. 

केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा, जिन्हें केन्द्र ने उनके अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेज दिया है, ने पिछली सुनवाई यानी 29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए हुई थी और इस दौरान उनका तबादला तक नहीं किया जा सकता. केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़े विवाद के बाद केन्द्र ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर दोनों अधिकारियों को अवकाश पर भेज दिया था. वर्मा ने उनके अधिकार लेने और अवकाश पर भेजने के सरकार के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. 

एजी केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दोनों अफसर बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे. ऐसा सख्त कदम उठाना हमारी विवशता थी. उस समय डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के कई फैसले और कदम ऐसे थे जो देश की सबसे बड़ी और ऊंची जांच एजेंसी की छवि को धूमिल कर सकते थे. जनता आपसी बहस कर उनकी आलोचना कर रही थी. ऐसे मे एजेंसी की साख बचाए रखने को हमने निदेशक को इम्मोबिलाइज कर दिया.

सीवीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की. उन्होंने कहा कि कानून कहता है कि सीवीसी सीबीआई के क्षमतापूर्ण कामकाज के प्रति जिम्मेदार है. किसी पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर केंद्र सरकार सीवीसी को जांच के लिए कह सकती है. सीवीसी खुद भी जांच कर सकती है या किसी को नियुक्त कर सकती है. उन्होंने कहा कि सीबीआई पर निगरानी रखना हमारे कानूनी अधिकारों के दायरे में है. हमारी स्वायत्तता के इन विशेषाधिकारों को कोई वापस नहीं ले सकता.

मामले में सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.

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Alok Verma Case in Supreme Court Updates:


-सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की दलील: 

-वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दोनों अफसर बिल्लियों की तरह लड रहे थे. ऐसा सख्त कदम उठाना हमारी विवशता थी.

- केंद्र सरकार को सीबीआई में हो रही गतिविधियों की चिंता हुई. क्योंकि दो बड़े अफसर लड़ रहे थे. अफसरों की आपसी लड़ाई में भ्रष्टाचार के आरोपों को हथियार बनाया गया. दो शीर्षस्थ अफसर लड़ रहे थे और सारा विवाद तूल पकड़ गया. सीवीसी को जांच कर तय करना था कि कौन सही है कौन गलत. लेकिन वो पब्लिक में चले गए. 

- AG ने मीडिया की खबरें दिखाईं. सीबीआई के अफसरों के बीच चल रहे विवाद और झगड़े की ये सब जानकारी अखबारों और मीडिया की है. सब कुछ पब्लिक डोमेन में है. जुलाई से ही दोनों के बीच खबरें आनी शुरु हुईं. एजी ने टेलीग्राफ व आउटलुक की खबरें दिखाईं. 

- AG बोले- आलोक वर्मा अभी भी निदेशक हैं. सरकारी बंगला कार सब कुछ वही है. अस्थाना भी स्पेशल डायरेक्टर हैं. 

AG ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने हमारे पास मीडिया रिपोर्ट्स का पुलिंदा भेजा है. हमने वर्मा को सिर्फ छुट्टी पर भेजा है. गाड़ी, बंगला, भत्ते, वेतन और यहां तक कि पदनाम भी पहले की तरह है. आज की तारीख में वही सीबीआई निदेशक हैं. 

-अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में बहस की. उन्होंने कोर्ट को बताया, 'सरकार ने सीवीसी की सलाह पर फैसला लिया था. दोनों अफसरों के बीच विवाद से सीबीआई का भरोसा लोगों में हिल गया था. ये फैसला बड़े जनहित और संस्थान का गरिमा बचाने के लिए लिया गया था. सरकार ने संस्थानिक अखंडता को बचाने के लिए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला किया. आसाधारण हालात तो देखते हुए सीवीसी जांच पूरी होने तक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया.

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-अस्थाना द्वारा आलोक पर लगाए गए आरोपों को कैबिनेट सेक्रेट्री द्वारा सीवीसी को भेजा गया. केंद्र सरकार को सीबीआई में हो रही गतिविधियों की चिंता हुई, क्योंकि दो बड़े अफसर लड़ रहे थे. अफसरों की आपसी लड़ाई में भ्रष्टाचार के आरोपों को हथियार बनाया गया. दो शीर्षस्थ अफसर लड़ रहे थे और सारा विवाद तूल पकड़ गया.

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दरअसल, केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा, जिन्हें केन्द्र ने उनके अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेज दिया है, ने पिछली सुनवाई यानी 29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए हुई थी और इस दौरान उनका तबादला तक नहीं किया जा सकता. 

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बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर केन्द्रीय सतर्कता आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट पर सोमवार को सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले, सोमवार को आलोक वर्मा से कहा था कि वह सीवीसी की रिपोर्ट पर आज ही सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब दाखिल करें. साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले की सुनवाई के निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव नहीं किया जायेगा. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने जवाब दाखिल करने के लिये सोमवार की सुबह जब थोड़ा वक्त देने का अनुरोध किया तो न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई का कार्यक्रम स्थगित करने से इनकार कर दिया.

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