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मोदी सरकार ने खत्‍म किया अनुच्छेद 370, जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख होंगे केंद्र शासित प्रदेश

राज्यसभा में हंगामे के बीच गृहमंत्रीअमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की सिफारिश की है.

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खास बातें

  1. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनेंगे केंद्र शासित प्रदेश
  2. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी
  3. सरकार को मिला बीएसपी का समर्थन
नई दिल्ली:

राज्यसभा में हंगामे के बीच गृहमंत्री  अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान कर दिया गया है. राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के कई खंड लागू नहीं होंगे. सिर्फ खंड एक बचा रहेगा. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया है. वहीं उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेगा और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा.  जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनेगा. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का सहारा लेकर तीन परिवारों ने सालों तक जम्मू-कश्मीर को लूटा है. अमित शाह ने कहा, नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद जी कहते हैं कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़ता है यह सही नहीं है. महाराज हरि सिंह ने 27 अक्टूबर को 1947 को भारत के साथ विलय पर दस्तखत किए थे. लेकिन अनुच्छेद 370  को 1954 में  लाया गया था.  अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने में एक सेकेंड भी नहीं लगना चाहिए.  सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वह 2-3 सांसदों का संविधान की कॉपी फाड़ने के फैसले की निंदा करते हैं. हम भारत के संविधान के साथ खड़े हैं. हम हिंदुस्तान की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा देंगे. लेकिन आज बीजेपी ने संविधान की हत्या कर दी है. दूसरी बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले का समर्थन किया है. बीएसपी के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 हटाने का पूरा समर्थन करती है. हम चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े बिल पास हों.

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दूसरी ओर पीडीपी के राज्यसभा सांसद नजीर अहमद और एमएम फैयाज ने सरकार के फैसले का संसद परिसर में विरोध किया है. इससे पहले उनको राज्यसभा से बाहर जाने के लिए कहा गया

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जम्‍मू-कश्‍मीर का क्षेत्रफल के हिसाब से बड़ा डिविजन लद्दाख है. काफी समय से वहां के लोगों की मांग थी कि इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश की मान्‍यता मिले. वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए इसे जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.

- राज्‍यसभा में पारित हुआ जम्‍मू कश्‍मीर पुनर्गठन बिल, पर्चियों के जरिए हुई वोटिंग. पक्ष में 125 वोट, विरोध में पड़े 61 वोट.

- हम घाटी के युवाओं को गले लगाना चाहते हैं उनकों अच्छी शिक्षा और अच्छा भविष्य, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार देना चाहते हैं. भारत के अंदर जिस प्रकार से विकास हुआ है, उसी तरह से कश्मीर में विकास हो इसके लिए आर्टिकल 370 को निकालना जरूरी है : अमित शाह

- मैं मानता हूं कि जब तक आर्टिकल 370 और 35A है तब तक कश्मीर से आतंकवाद की समाप्ति नहीं हो सकती. कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करने के लिए आर्टिकल 370 और 35A हटाना निहायत जरूरी है : अमित शाह

- जो लोग कश्मीर के युवाओं को उकसाते हैं उनके बेटे-बेटियां लंदन, अमेरिका में पढ़ाई करते हैं. उनको चिंता नहीं है क्योंकि उन्होंने तो सब अच्छे से कर लिया. मगर घाटी के युवा को आज भी अनपढ़ रखने, उनका विकास न करने के लिए आर्टिकल 370 बहुत बड़ी बाधक है : अमित शाह

- 370 के कारण आज तक 41,894 लोग जम्मू कश्मीर में किस की पॉलिसी के कारण मारे गए? जवाहर लाल नेहरू जो पॉलिसी चालू करके गये वो ही पॉलिसी अभी तक चल रही है, फिर इतनी मौतों का जिम्मेदार कौन है? : अमित शाह

- शिक्षा के अधिकार को, महिलाओं के सारे अधिकार के कानून और उनको और उनके बच्चों को अधिकार देना है तो भी आर्टिकल 370 हटनी चाहिए : अमित शाह

- शाह ने कहा, 'आर्टिकल 370 और 35A हटने के बाद जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बनने वाला है. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू और कश्मीर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कंपनियां नहीं जा सकती. ये कंपनियां वहां गई तो वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा. बड़ी कंपनियां वहां गईं तो पर्यटन बढ़ेगा. लेकिन 370 के कारण ये संभव नहीं है. 370 के कारण जम्मू कश्मीर में देश का कोई बड़ा डॉक्टर नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहां वो अपना घर नहीं खरीद सकता, वहां का मतदाता नहीं बन सकता और वहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता. 370 आरोग्य में भी बाधक है.'

- अमित शाह ने कहा, 'भारत सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जम्मू और कश्मीर के लिए भेजे, लेकिन वो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, 370 का उपयोग करके वहां भ्रष्टाचार को कंट्रोल करने वाले कानून लागू नहीं होने दिए गए. हम तो राष्ट्र हित का बिल लेकर आए हैं. आपने इंदिरा जी को इलाहाबाद के जजमेंट से बचाने का संवैधानिक सुधार उसी दिन लाकर, उसी दिन पारित करके देश की डेमोक्रेसी को खत्म किया था. और आज हमें उपदेश देते हैं. आर्टिकल 370 और 35A हटाने से घाटी का, जम्मू का, लद्दाख का भला होने वाला है.'

- जम्मू और कश्मीर के विकास में बाधक भी आर्टिकल 370 है. शिक्षा के लिए यहां के बच्चों को देशभर के शिक्षा संस्थानों पर जाना पड़ता है इसका भी कारण 370 है : अमित शाह

- आर्टिकल 370 अस्थाई था और इसे कभी न कभी हटना था लेकिन पिछली सरकारों ने वोट बैंक के लिए इसे हटाने की हिम्मत नहीं की. कैबिनेट ने आज हिम्मत दिखाकर और जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित के लिए यह फैसला लिया है: अमित शाह

- मैं आज सदन के सामने जम्मू कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक संकल्प और बिल लेकर उपस्थित हुआ हूं. मैं सदन के सामने स्पष्ट करना चाहता हूं कि जम्मू कश्मीर में एक लंबे रक्तपात भरे युग का अंत धारा 370 हटने के बाद होने जा रहा है : अमित शाह

- राज्‍यसभा में अमित शाह ने कहा, 'धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और घाटी के लोगों का बहुत नुकसान किया है. शरणार्थियों को आज तक नागरिकता नहीं मिली.'

- घाटी में मुसलमान, हिंदू, सिख, जैन सभी रहते हैं. धारा 370 अच्‍छी है तो सबके लिए अच्‍छी है और बुरी है तो सबके लिए बुरी है.

- राज्‍यसभा में बोले गृह मंत्री अमित शाह, '370 की वजह से जम्‍मू कश्‍मीर में विकास नहीं पाया, आतंकवाद की जड़ भी धारा 370 है'

- गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर के संबंध में लोकसभा में संकल्प पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से स्वीकार किया.

राष्ट्रपति की ओर से जारी हुआ आदेश

राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद की ओर से जारी संवैधानिक आदेश में जम्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा की गई. इसकी धोषणा देश के गृहमंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में की

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में जम्‍मू-कश्‍मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा की. अमित शाह ने कहा कि लद्दाख को जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा रहा है. जम्‍मू-कश्‍मीर भी विधानसभा वाला एक केंद्र शासित प्रदेश होगा.

आपको बता दें कि इससे पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ  सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी शामिल थे.इसके बाद कैबिनेट की बैठक हुई. लेकिन कैबिनेट में क्या हुआ, इस बात की जानकारी देने के लिए होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाल दिया गया.  

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कश्मीर पर जारी उठापटक के बीच बीते कुछ घंटों की सिलसिलेवार कहानी यह है:

  • घाटी में मोबाइल इंटरनेट बंद किया गया, इसके बाद जम्मू में भी मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया.
  • यह करने से पहले ही राज्य में कम्युनिकेशन के लिए तमाम आला अफसरों, चीफ सेक्रेटरी से लेकर एसएचओ लेवल तक के अधिकारियों को सैटेलाइट फोन दिेये गये । ताकि वो लॉ एंड ऑर्डर में इनका इस्तेमाल कर सकें.
  • इसके बाद रात करीब 11 बजे कश्मीर औऱ जम्मू घाटी में धारा 144 लागू करने की घोषणा की गई. यह आदेश सुबह 4 बजे से अमल में लाया जा चुका है. 
  • महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन समेत श्रीनगर में हुई मीटिंग में शामिल तमाम नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है . उनको घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी जायेगी. 
  • CPM के कश्मीरी नेता और पूर्व एमएलए तारीगामी भी नज़रबंद हैं .
  • घाटी और जम्मू क्षेत्र के तमाम स्कूल-कॉलेजों को क्रमवार बंद रखने का आदेश जारी कर दिया गया  है.
  • देर रात 11 बजे के बाद गवर्नर सत्यपाल मलिक ने चीफ सेक्रेटरी, तमाम सलाहकारों, डीजीपी और लॉ-एंड-ऑर्डर से संबंधित तमाम आला पुलिस अफसरों से इमरजेंसी मीटिंग की.
  •  जम्मू और कश्मीर में लैंडलाइन फोन में भी बाधा आने की घटनाएं हुई हैं. 
  • लाइन ऑफ कंट्रोल पर कम से कम 4 इलाकों में पाकिस्तान द्वारा सीज़फायर उल्लंघन का भारतीय सेना की ओर से जबरदस्त जवाब दिया जा रहा है.
  • भारतीय सेना और वायुसेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर है.
  • सुबह साढे 9 बजे पीएम आवास पर कैबिनेट और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की मीटिंग हो चुकी है.


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