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जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में पेश हुआ, अमित शाह की जगह गृह राज्‍यमंत्री ने किया पेश

इस विधेयक का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले अध्यादेश की जगह लेना है.

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जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में पेश हुआ, अमित शाह की जगह गृह राज्‍यमंत्री ने किया पेश

इस बिल से जम्मू-कश्मीर के कमजोर वर्ग को फायदा होगा.

खास बातें

  1. 28 फरवरी को अध्यादेश को मिली थी मंजूरी
  2. कमजोर वर्ग के युवाओं को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण
  3. अमित शाह का लोकसभा में यह पहला बिल
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. प्रधानमंत्री की मौजूदगी में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बिल रखा. इस बिल में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहनेवालों को आरक्षण देने का प्रावधान है. नौकरी, प्रमोशन और उच्च शिक्षा में आरक्षण का फ़ायदा मिलेगा. इसके लिए जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया है. मोदी सरकार इस साल फ़रवरी में इसके लिए अध्यादेश लेकर आई थी. अब तक LoC के पास के इलाक़े में रहनेवाले लोगों को ही आरक्षण का लाभ मिलता था. हालांकि पहले यह बिल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पेश करने वाले थे. पिछले महीने राष्ट्रीय चुनावों में पार्टी की निर्णायक जीत और निचले सदन और मंत्रिमंडल की नियुक्ति के बाद संसद में भाजपा अध्यक्ष का यह पहला विधेयक होता. मालूम हो इस विधेयक को पहले अध्यादेश के रूप में लागू किया गया था. 28 फरवरी को केंद्रीय कैबिनेट ने 'जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) अध्यादेश, 2019' को मंजूरी दी थी और इसे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भी पास कर दिया था. 

जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन करते हुए यह अध्यादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों की तरह प्रदान करता है


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इस विधेयक का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले अध्यादेश की जगह लेना है. इससे जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी धर्म या जाति के युवा को राज्य सरकार की नौकरियां प्राप्त करना आसान हो जाएगा.  जनवरी 2019 में 103 वें संविधान संशोधन के जरिए देश के बाकी हिस्सों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था.

फिर बोले अमित शाह: मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आई तो खत्म कर देंगे अनुच्छेद 370

अमित शाह के विधायी एजेंडे का बारीकी से पालन करने की उम्मीद है और जम्मू-कश्मीर से संबंधित इस विधेयक के साथ शुरूआत करने का उनका निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बता दें लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते समय शाह ने संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने की बात कही थी. साथ ही अपने चुनावी घोषणा पत्र में बीजेपी ने अनुच्छेद 35A को खत्म करने के अपने इरादे को भी दोहराया था. 

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