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Amritsar Train Accident: क्या ये हैं अमृतसर ट्रेन हादसे के 5 जिम्मेदार

पंजाब के अमृतसर (Amritsar train accident) में दशहरे के दिन रावण दहन का हर्षोल्लास कब कुछ पल में ही मातम में बदल गया किसी को पता भी नहीं चला.

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Amritsar Train Accident: क्या ये हैं अमृतसर ट्रेन हादसे के 5 जिम्मेदार

Amritsar Train Accident: अमृतसर में बड़ा ट्रेन हादसा

खास बातें

  1. अमृतसर हादसे में 61 लोगों की मौत
  2. रावण दहन देखने के दौरान हुआ हादसा
  3. प्रशासन भी सवालों के घेरे में
अमृतसर:

पंजाब के अमृतसर (Amritsar train accident) में दशहरे के दिन रावण दहन का हर्षोल्लास कब कुछ पल में ही मातम में बदल गया किसी को पता भी नहीं चला. दरअसल, अमृतसर में शुक्रवार की शाम रावन दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 61 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है. दरअसल, अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास शुक्रवार शाम दशहरा (Dussehra 2018) के मौके पर रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी थी. लोग रेल की पटरियों पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार में ट्रेन आई और सैकड़ों लोगों को कुचलती हुई चली गई. अब इस हादसे के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रेलवे फाटक और क्रॉसिंग की जगह पर यह आयोजन क्यों हुआ, आखिर किसने दी अनुमति, क्या आयोजकों ने प्रशासन से अनुमति ली थी. तो चलिए जानते हैं कि किन-किन पर इस हादसे की जिम्मेदारी की बनती है. 

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पुलिस-प्रशासन: दरअसल, दशहरे को लेकर हर जगह पुलिस प्रशासन को अलर्ट पर रखा जाता है. भीड़-भाड़ वाले आयोजनों के मद्देनजर मेले की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की कमान पुलिस पर होती है. मगर अमृतसर में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां प्रशासन ने सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किये थे. बताया जा रहा है कि वहां महज कुछ पुलिसवाले ही थे, जिनके सिर पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेवारी थी. 

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रावण दहन कार्यक्रम के आयोजक: बताया जा रहा है कि पंजाब के अमृतसर (Amritsar) में जिस जगह रेल हादसा हुआ, वहां पिछले साल दशहरे का आयोजन इस जगह पर नहीं हुआ था. मगर इस साल यह आयोजन हुआ है और इस साल कांग्रेस पार्षद के बेटे ने कार्यक्रम का आयोजन किया था. पूरे मामले में कांग्रेस पार्षद के बेटे सौरभ मिठू मदान का नाम सामने आ रहा है. दूसरी तरफ, जहां आयोजन किया गया था (खाली जमीन) और रेलवे ट्रैक के बीच 5 फ़ुट ऊंची दीवार थी, लेकिन तमाम लोग ऊंचाई से बेहतर नज़ारा देखने के लिए दीवार और ट्रैक पर खड़े थे. अब सवाल उठता है कि क्या आयोजक ने प्रशासन से अनुमति ली थी, और अगर ली थी तो फिर प्रशासन ने सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई.

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रेलवे: भारतीय रेलवे ने भले ही अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया हो, मगर क्या रेलवे को यह जानकारी नहीं थी कि इस बार वहां बड़े पैमाने पर रावण दहन का आयोजन होना है? बताया जा रहा है कि रेलवे ने कोई सावधानी अथवा चेतावनी भी जारी नहीं की थी. वहीं, गेटमैन भी अलर्ट पर नहीं था. हालांकि, रेलवे ने इस कार्यक्रम को अतिक्रमण का मामला बताया है. 

राज्य और केंद्र सरकार: इस हादसे के पीछे सरकार की विफलता भी किसी मायने में कम नहीं है. बताया जा रहा है कि सरकार के पास ऐसे आयोजनों के आंकड़ें नहीं हैं. सरकारों के पास डाटा  भी नहीं है कि कहां-कहां किस तरह के आयोजन होते हैं और कहां पर किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था करनी है?  सरकारी ग्राउंड पर ऐसे आयोजनों के लिए सरकार को एक मापदंड स्थापित करना चाहिए. 

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बेहतर नजारा देखने का परिणाम: बताया जा रहा है कि जहां हादसा हुआ वह जगह जोड़ा फाटक से 400 फुट की दूरी पर है. अमृतसर में शुक्रवार शाम को रावण दहन देखने के लिए लोग रेल की पटरी पर खड़े थे. लोगों को वहां से रावण दहन का बेहतर नजारा दिख रहा था. यही वजह है कि भीड़ वहीं से रावण दहन देखने लगी. 

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