एंकर अमिश देवगन को SC से राहत नहीं, सूफी संत के खिलाफ टिप्पणी मामले में चलेगा केस

एक समाचार चैनल पर ‘आर पार’ नाम के शो में 15 जून को सूफी संत के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने के मामले में देवगन के खिलाफ राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में कई FIR दर्ज किए गए हैं. हालांकि, बाद में उन्होंने ट्वीट करके खेद जताया था और कहा था कि वह दरअसल मुस्लिम शासक अलाउद्दीन खिलजी का जिक्र कर रहे थे और गलती से चिश्ती का नाम बोल गये.

एंकर अमिश देवगन को SC से राहत नहीं, सूफी संत के खिलाफ टिप्पणी मामले में चलेगा केस

अमिश देवगन ने अपने शो में मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर की थी टिप्पणी.

खास बातें

  • एंकर अमिश देवगन को राहत नहीं
  • FIR रद्द करने की मांग को SC ने किया खारिज
  • सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ टिप्पणी करने का है मामला
नई दिल्ली:

पत्रकार अमिश देवगन (Anchor Amish Devgan) के खिलाफ सूफी संत (Sufi Saint Moinuddin Chishti) के खिलाफ टिप्पणी करने वाले मामले में दाखिल FIR रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर जांच में सहयोग करते रहेंगे तो गिरफ्तारी से सुरक्षा मिलती रहेगी.

बता दें कि इसके साथ ही सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने अमिश देवगन के खिलाफ सभी एफआईआर अजमेर ट्रांसफर कर दी हैं. पहली एफआईआर अजमेर में दर्ज की गई थी. बाद में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी एफआईआर दर्ज की गई थी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना समेत विभिन्न राज्यों में देवगन के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों को राजस्थान के अजमेर में स्थानांतरित कर दिया. बता दें कि पीठ ने देवगन को प्राथमिकी के संबंध में किसी कठोर कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया था. इसके बाद से न्यायालय पत्रकार को किसी भी कठोर कार्रवाई से संरक्षण की अवधि बढ़ाता आ रहा है.

क्या है पूरा मामला?

एक समाचार चैनल पर ‘आर पार' नाम के शो में 15 जून को सूफी संत के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने के मामले में देवगन के खिलाफ राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में कई FIR दर्ज किए गए हैं. हालांकि, बाद में उन्होंने ट्वीट करके खेद जताया था और कहा था कि वह दरअसल मुस्लिम शासक अलाउद्दीन खिलजी का जिक्र कर रहे थे और गलती से चिश्ती का नाम बोल गये.

यह भी पढ़ें : रिपब्लिक टीवी और अर्नब को राहत नहीं, SC का FIR रद्द करने और जांच CBI को सौंपने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार

देवगन ने FIR दर्ज करने के अनुरोध को लेकर वकील मृणाल भारती के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने कहा था कि उनकी जुबान फिसल गयी थी और वह इसके लिए पहले ही खेद प्रकट कर चुके हैं. देवगन ने शीर्ष अदालत से कहा, ‘किसी भी प्राथमिकी में यह नहीं कहा गया कि सार्वजनिक व्यवस्था खराब हो रही है.' वहीं, राजस्थान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि जांच करना पुलिस का अधिकार है. शीर्ष अदालत ने देवगन को अंतरिम राहत देते हुए प्रसारण से संबंधित मामलों में पत्रकार के खिलाफ जांच पर भी रोक लगा दी थी.

याचिका में कहा गया कि टीवी कार्यक्रम में परिचर्चा के दौरान एक पैनल सदस्य ने चिश्ती (ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती) को कुछ पंक्तियों का ज़िक कर दिया और गलती से देवगन ने भी चिश्ती नाम का जिक्र कर दिया, जबकि वह खिलजी (अलाउद्दीन खिलजी) का जिक्र करना चाहते थे. जुबान फिसल जाने को फौरन ही महसूस करते हुए याचिकाकर्ता ने स्पष्टीकरण दिया और स्पष्ट किया कि चिश्ती का जिक्र गलती से और अनजाने में हो गया.

(भाषा से इनपुट के साथ)

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