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अण्‍णा हजारे ने कहा : 2014 चुनाव में बीजेपी ने किया था मेरा इस्तेमाल, मेरी वजह से सत्ता में आए

अण्‍णा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार भी बीते चार सालों से राज्य की जनता से झूठ पर झूठ बोल रहे हैं. यह झूठ ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा.

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अण्‍णा हजारे ने कहा : 2014 चुनाव में बीजेपी ने किया था मेरा इस्तेमाल, मेरी वजह से सत्ता में आए

रालेगन सिद्धि में अनशन पर बैठे अण्‍णा हजारे ने बीजेपी पर लगाए आरोप

रालेगन सिद्धि:

समाजसेवी अण्‍णा हजारे (Anna Hazare) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर सोमवार को संगीन आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव में जीत के लिए मेरा इस्तेमाल किया था. अण्‍णा हजारे (Anna Hazare) ने कहा कि 'हां, बीजेपी ने 2014 में मेरा इस्तेमाल किया था. यह सभी को पता है कि लोकपाल को लेकर मेरी लड़ाई ने बीजेपी और आम आदमी पार्टी को सत्ता में आने में कैसे मदद की. अब मेरे (Anna Hazare) मन में इनके लिए कोई इज्जत नहीं बची है.' बता दें कि अण्‍णा हजारे (Anna Hazare) राज्य और केंद्र सरकार से अपनी मांगें मनवाने को लेकर बीते कुछ दिनों से अपने गांव रालेगण सिद्धि में भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

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उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी लोगों को गुमराह कर रहे हैं और देश को तानाशाही की तरफ ले जा रहे हैं. अन्ना ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार भी बीते चार सालों से राज्य की जनता से झूठ पर झूठ बोल रहे हैं. यह झूठ ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा. केंद्र और राज्य सरकार ने देश की जनता के भरोसे को तोड़ा है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कहती है कि उनकी 90 फीसदी मांगे मांग ली गई हैं लेकिन यह एक बड़ा झूठ है. वह हमेशा कहते रहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री अलग-अलग मुद्दों पर बात करने मेरे पास आएंगे. लेकिन मैंने उन्हें पहले ही मना कर दिया है. मुझे उनपर अब भरोसा नहीं रहा है यही वजह है कि मुझे अब हर चीज लिखित में चाहिए. 

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अण्‍णा हजारे बीते छह दिनों से अनशन पर हैं. उन्होंने रविवार को कहा था कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह पद्म भूषण पुरस्कार भी लौटा देंगे. इससे पहले दिन में भाजपा की सहयोगी शिवसेना हजारे के समर्थन में आगे आयी और उनसे आग्रह किया कि वह समाजवादी कार्यकर्ता जयप्रकाश नारायण की तरह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करें. हजारे ने केंद्र में लोकपाल और महाराष्ट्र में लोकायुक्त की तत्काल नियुक्ति और किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए बुधवार को अहमदनगर जिले में स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में अनशन शुरू किया था. हजारे ने रविवार शाम कहा, "अगर यह सरकार अगले कुछ दिनों में देश से किए अपने वायदों को पूरा नहीं करती है तो, मैं अपना पद्म भूषण लौटा दूंगा." उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है." 81 वर्षीय कार्यकर्ता को 1992 में तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया गया था.  

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अण्‍णा हजारे केंद्र में भ्रष्टाचार रोधी निकाय लोकपाल और राज्य में लोकायुक्तों की नियुक्ति के अलावा किसानों की परेशानियों को हल करने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और चुनाव सुधार की मांग कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता की मांगों के समर्थन में, किसानों एवं युवाओं ने सोमवार सुबह यहां से करीब 38 किलोमीटर दूर पारनेर तहसील के सुपा गांव में अहमदनगर-पुणे राज्य राजमार्ग को अवरूद्ध कर दिया. इससे वहां भारी जाम लग गया. सुपा थाने के निरीक्षक राजेंद्र भोंसले ने कहा कि पुलिस ने आंदोलनकारियों को शांत करने की कोशिश की और उनसे अवरोध खत्म करने को कहा, क्योंकि सड़क पर दोनों ओर छह किलोमीटर लंबा यातायात जाम लग गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस ने सड़क पर से अवरोध खत्म करने के लिए दोपहर को करीब 110 आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें छोड़ दिया. हजारे की आज सुबह स्वास्थ्य जांच करने वाले डॉ. धनंजय पोटे ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता का बीते पांच दिन में 3.8 किलोग्राम वजन कम हो गया है, जबकि उनका रक्तचाप, रक्त में शकरा की मात्रा (ब्लड शुगर) मूत्र में क्रिएटिनिन की मात्रा बढ़ गई है.    

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अण्‍णा हजारे के सहयोगियों ने बताया कि जिले के करीब पांच हजार किसान हजारे के आंदोलन के समर्थन में सोमवार को अहमदनगर के कलेक्टर के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर सकते हैं. कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय शनिवार रात को रालेगण सिद्धि में हुई ग्राम सभा में लिया गया. पारनेर तहसील की विभिन्न राजनीति पार्टियों के नेता ग्राम सभा में मौजूद थे और उन्होंने हजारे के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया. शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि वह सामाजिक कार्यकर्ता की जिंदगी से ना खेले.

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ठाकरे ने हजारे से अपनी जिदंगी त्यागने के बजाय सड़क पर उतरने को कहा. साथ में उनसे अनुरोध किया कि उन्हें नारायण जैसी भूमिका निभानी चाहिए. समाजवादी कार्यकर्ता ने 1970 के देश में इंदिरा गांधी सरकार का मुकाबला किया था. शिवसेना नेता ने कहा कि हजारे का हश्र जीडी अग्रवाल की तरह नहीं होना चाहिए जिन्होंने स्वच्छ गंगा के लिए अनशन किया था और उनका निधन हो गया था. हजारे ने अपनी मांगों पर चर्चा के संबंध में राज्य सरकार के दूत और मंत्री गिरीश महाजन से मिलने से इनकार कर दिया था.

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