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हाथ मिलाने के साथ AIADMK के दोनों धड़ों का विलय, पनीरसेल्वम बने डिप्टी सीएम

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी और बागी नेताओं पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों का विलय हो गया.

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हाथ मिलाने के साथ AIADMK के दोनों धड़ों का विलय, पनीरसेल्वम बने डिप्टी सीएम

अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों का विलय

खास बातें

  1. पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम के धड़ों का विलय
  2. शशिकला को निकालने पर अड़ा पनीरसेल्वम धड़ा
  3. आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद है शशिकला
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी और बागी नेताओं पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों का विलय हो गया. दोनों नेताओं के हाथ मिलाने के साथ ही इस विलय का ऐलान हुआ. पनीरसेल्वम को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है. उन्हें वित्त मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय सौंपा गया है. पनीरसेल्वम एआईएडीएमके के संयोजक होंगे. वहीं पलानीसामी ने साफ किया है कि एआईएडीएमके का दो पत्तों वाला पुराना चुनाव चिह्न ही होगा.

संभव है कि पलानीस्वामी के नेतृत्व वाला धड़ा पार्टी प्रमुख वीके शशिकला के संबंध में कुछ घोषणा करे, क्योंकि पनीरसेल्वम समूह उन्हें पार्टी से निकालने जाने पर अड़ा हुआ है. शशिकला फिलहाल आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद हैं. सूत्रों के मुताबिक- पलानीस्वामी शशिकला को निकालने की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन विलय के दौरान ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई.

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​शशिकला जयललिता की लंबे समय तक दोस्त रहीं और उन्होंने दिसंबर में उनकी मौत के बाद पार्टी का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया और पद की दावेदारी की ओर बढ़ने लगीं. इस दौरान ओ पनीरसेल्वम पर गिरती गाज के बीच पनीरसेल्वम ने विद्रोह कर दिया. शशिकला की योजनाओं पर उस समय पानी फिर गया जब उन्हें करप्शन चार्जेस में कोर्ट द्वारा चार साल की सजा सुना दी गई. जेल जाने से पहले उन्होंने नए मुख्यमंत्री के तौर पलानीस्वामी का नाम दिया और उनके भतीजे दिनाकरन को भी AIADMK के उप महासचिव पद से हटना पड़ेगा.

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मुख्यमंत्री का धड़ा पहले ही 10 अगस्त के अपने प्रस्ताव में पार्टी प्रमुख के भांजे और पार्टी के उपमहासचिव टीटीवी दिनाकरण को बाहर का रास्ता दिखाकर विलय का मंच तैयार कर चुका था. उधर, दिनाकरण के नेतृत्व वाले धड़े ने इसे ड्रामा बताते हुए इसका मजाक उड़ाया है. उनके समूह का कहना है कि उनके नेता के पास विलय के संबंध में लिये जाने वाले फैसले पर ‘रोक लगाने की क्षमता है.’

 


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